चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने सतलुज-यमुना लिंक को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच चल रहे पुराने विवाद को सुलझाने के लिए एक बार फिर प्रयास शुरू किए हैं।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इस संबंध में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है, ताकि मामले के समाधान को लेकर जल्द ही बैठक की जा सके। इसे लेकर 10 जुलाई को बैठक हो सकती है। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही केंद्र सरकार को साफ कर चुके हैं कि पंजाब के पास किसी भी अन्य राज्य के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है।
उन्होंने कहा है कि राज्य में पानी की गंभीर स्थिति को देखते हुए सतलुज-यमुना-लिंक नहर के बजाय यमुना-सतलुज-लिंक नहर के निर्माण पर विचार किया जाना चाहिए और यमुना से पंजाब को पानी दिया जाना चाहिए। मान ने कहा कि पंजाब ने बार-बार यमुना के पानी की वितरण के लिए बातचीत में शामिल होने की मांग की है, क्योंकि यमुना-सतलुज-लिंक परियोजना के लिए 12 मार्च, 1954 को पुराने पंजाब और उत्तर प्रदेश के बीच एक समझौता हुआ था। इसमें पुराने पंजाब को यमुना के पानी के दो-तिहाई हिस्से का हकदार बनाया गया था।
मान ने कहा कि इस समझौते में यमुना के पानी से सिंचाई के लिए किसी विशेष क्षेत्र को नहीं दर्शाया गया था। पंजाब और हरियाणा के बीच नदी जल वितरण के समय यमुना के पानी पर विचार नहीं किया गया, जबकि रावी और ब्यास के पानी को ही विचार में लिया गया।
मई में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से पंजाब और हरियाणा को मामले को सुलझाने के लिए केंद्र के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने पहले जल शक्ति मंत्री को इस मामले में मुख्य मध्यस्थ नियुक्त किया था और मामले में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए थे।