चंडीगढ़ के कॉलेजों के शिक्षकों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष है लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के शिक्षकों की रिटायरमेंट की आयु 60 वर्ष है। केंद्र सरकार की इस नोटिफिकेशन के चलते पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने पर निर्णय लेने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है। केंद्र को 20 अक्तूबर तक इस मामले में जवाब दाखिल करना होगा।
याचिका दाखिल करते हुए डॉ. संगीता भल्ला ने हाईकोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने 23 मार्च 2022 को नोटिफिकेशन जारी करते हुए चंडीगढ़ के कर्मचारियों पर सेंट्रल सिविल सर्विस रूल लागू कर दिए। यह नियम शिक्षकों पर भी लागू हुए और उनकी रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष हो गई। यह नियम एडेड कॉलेज और पीयू पर लागू नहीं किए गए। ऐसे में पीयू के विभागों में कार्यरत शिक्षकों की रिटायरमेंट आयु 60 वर्ष ही रही।
याचिका में हाईकोर्ट से अपील की गई कि पीयू के शिक्षकों की रिटायरमेंट की आयु भी 65 वर्ष करने का निर्देश जारी किया जाए। हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि पीयू इंटरस्टेट बॉडी कॉर्पोरेट है ऐसे में इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी कैसे माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि पीयू के फाइनेंशियल फैसले भी केंद्र सरकार करती है और ऐसे में एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी के रूप में सभी आवश्यक खूबियां पीयू में हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को पीयू को औपचारिक रूप से केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित कर देना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने इस विषय पर केंद्रीय गृह मंत्रालय का पक्ष पेश करने के लिए समय मांगा। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को मोहलत देते हुए सुनवाई 20 अक्तूबर तक स्थगित कर दी।