मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को भली-भांति पता है कि इन फंडों को राज्य की अनाज मंडियों, ग्रामीण इलाकों में सड़कों के निर्माण जैसे अहम कृषि मंडीकरण बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जाता है। यह फंड जारी न करने की सूरत में गांव के विकास में रुकावट आएगी और किसानों में गुस्सा और बढ़ेगा जो पहले ही केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।
केंद्र को आरडीएफ के 1000 करोड़ रुपये देना है : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि कानूनों पर विवाद के बीच 1000 करोड़ रुपये से अधिक राशि के रूप में आरडीएफ की अदायगी पंजाब को जारी न करने के केंद्र सरकार के फैसले की टाइमिंग को लेकर अलग-अलग से शंकाएं जाहिर की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि फैसला लेने का समय संदिग्ध है और यह कदम संदेहास्पद इरादे की तरफ इशारा करता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को फैसले पर तुरंत दोबारा गौर करने और राज्य को आरडीएफ के फंडों की अदायगी करने की अपील करते हुए कहा कि बीते समय की तरह मौजूदा समय भी इन फंडों की जांच जारी है।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सभी राजनैतिक पार्टियों के विधायकों को चार नवंबर को राष्ट्रपति से मिलने के लिए साथ चलने की अपील की है ताकि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को प्रभावहीन बनाने के लिए राज्य विधानसभा द्वारा पारित खेती संशोधन कानूनों पर उनकी जल्द सहमति के लिए ज्ञापन सौंपा जाए। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पहले ही राष्ट्रपति से मिलने का समय मांग चुके हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों को राज्य के हितों की रक्षा के लिए खड़े होने और निजी सियासी हितों से ऊपर उठने की अपील करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से किसानों के हितों को रौंदा जा रहा है। केंद्र सरकार की तरफ से हाल ही में लाए तीन कृषि कानून पंजाब के किसान समुदाय के लिए विनाशकारी सिद्ध होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के हितों की हिफाजत करना उनका फर्ज बनता है और हाल ही में पंजाब विधानसभा में पास संशोधन विधेयक इसका प्रत्यक्ष तौर पर उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा पंजाब में माल गाड़ियों की आवाजाही और ग्रामीण विकास फंड रोकने पर गंभीर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस कदम से वित्तीय और आर्थिक नाकाबंदी का प्रभाव नजर आता है।