उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग ने पंजाब के लिए कुछ विशेष क्षेत्रों और विशेष ग्रांटों की सिफारिश की है, जिसकी राशि 3442 करोड़ और 1545 करोड़ रुपये बनती है। इसे भी भारत सरकार ने मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने अफसोस जताते हुए केंद्र से अपील की कि वह राज्य को जरूरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए यह विशेष अनुदान मुहैया करवाए।
कारोबार करने में आसानी के फलस्वरूप बीते चार वर्षों में पंजाब में 70000 करोड़ रुपये के ताजा निवेश का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार के मंत्रालयों और एजेंसियों द्वारा समय-समय पर की जाने वाली समीक्षा का बोझ घटाया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि बंदरगाह रहित पंजाब में ढुलाई और यातायात में सुधार लाने के लिए कदम उठाए जाएं, क्योंकि राज्य बंदरगाहों से दूरी के कारण माल की ढुलाई की अपनी संभावनाओं तक पहुंचाने में असमर्थ है।
मुख्यमंत्री ने जल्द खराब होने वाले खेती उत्पादों समेत अन्य प्रमुख वस्तुओं के निर्यात के लिए पंजाब के हवाई अड्डों (मोहाली, अमृतसर और लुधियाना) से मध्य पूर्वी और सीआईएस (कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेटस) देशों के लिए एयर कार्गो चलाने के लिए भारत सरकार से आर्थिक तौर पर प्रोत्साहन मांगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि पंजाब को सड़क के जरिये सरहद पार व्यापार करने की भी आज्ञा दी जा सकती है।
पंजाब को विशेष राज्य का वर्ग देने की मांग
कैप्टन ने पंजाब को विशेष वर्ग का दर्जा देने की मांग भी दोहराई, क्योंकि यह एक सक्रिय अंतरराष्ट्रीय सरहद से लगता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड की औद्योगिक विकास स्कीम की तर्ज पर पंजाब के सरहदी और कंडी जिलों के उद्योगों के लिए कैपिटल सब्सिडी, बीमा सब्सिडी और उद्योगों को जीएसटी मुआवजे की प्रतिपूर्ति के लिए विशेष वर्ग के दर्जे के तहत फंड दिया जाए।
पंजाब के लिए विशेष रेल प्रोजेक्टों की मांग
मुख्यमंत्री ने रेल मंत्रालय से ब्यास से कादियां तक नई रेलवे लाइन प्रोजेक्ट की शुरुआत करने की मांग की। उन्होंने मोहाली से राजपुरा तक नई रेल लाइन के विशेष रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी देने और खेमकरण-पट्टी से फिरोजपुर-मक्खू के बीच 25 किलोमीटर के नए रेल मार्ग के निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा।