भिवानी की 18 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सीबीआई की जांच को बड़ा झटका लगा है। पंचकूला की विशेष सीबीआई मजिस्ट्रेट अदालत ने एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए मृतका के परिजनों की प्रोटेस्ट पिटीशन स्वीकार कर ली है। अदालत ने जांच में गंभीर खामियां पाए जाने पर सीबीआई को नए सिरे से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 23 दिसंबर 2026 तक जांच की स्टेट्स रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
एम्स की रिपोर्ट से बदली जांच की दिशा
अदालत में पेश एम्स के पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों के संशोधित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, मनीषा की मौत गर्दन पर धारदार हथियार से लगी गंभीर चोट के कारण हुई थी। रिपोर्ट में चोट को मृत्यु से पहले का बताया गया है। वहीं, शरीर पर जानवर के काटने के निशान होने की बात भी खारिज की गई है। इससे पहले पुलिस ने जहर खाने और जानवरों द्वारा चेहरा क्षतिग्रस्त किए जाने की आशंका जताई थी।
डीवीआर कब्जे में रखने पर उठाए सवाल
अदालत ने नर्सिंग कॉलेज के सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को कब्जे में लेने की प्रक्रिया में लापरवाही पाई। एसआईटी प्रमुख डीएसपी ने डीवीआर लेते समय बरामदगी मेमो तैयार नहीं किया था। यह करीब 40 दिन तक उनके कब्जे में रहा। अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए इसे जांच की गंभीर कमी माना।