चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने का निर्णय लेते हुए 91 वर्ष या इससे अधिक आयु के याचिकाकर्ताओं को आवेदन देने को कहा है। हाईकोर्ट में वर्तमान में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े 28,409 मामले विचाराधीन हैं। हाईकोर्ट ने 91 वर्ष या उससे ज्यादा आयु के आवेदकों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने का फैसला लेते हुए वेबसाइट पर नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने उन्हें उम्र से जुड़े दस्तावेजों जैसे जन्म या शिक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र, आधार, पैन या वरिष्ठ नागरिक पहचान पत्र के साथ अनुरोध पत्र जमा करने को कहा है। निरक्षर व्यक्तियों के मामले में शपथ-पत्र ही पर्याप्त होगा। हाईकोर्ट का यह निर्णय वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो बढ़ती उम्र के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। लंबी कानूनी कार्यवाही उनके जीवन की चुनौतियों को और अधिक बढ़ा देती है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पर वर्तमान में 4,33,730 लंबित मामलों का बोझ है। इनमें 6,729 आपराधिक और 21,680 सिविल मामले हैं। 18,424 केस ऐसे हैं जो 20 से 30 साल से विचाराधीन हैं। 94624 केस ऐसे हैं जो 10 से 20 साल से विचाराधीन हैं और पांच से दस साल से विचाराधीन केसों की संख्या 1,18,810 है।
हाईकोर्ट में जजों के 85 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 55 जज ही कार्यरत हैं। 30 पद अभी खाली हैं। जस्टिस जीएस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की जा चुकी है और तीन जज इसी वर्ष रिटायर होने जा रहे हैं। ऐसे में जजों की कमी भी हाईकोर्ट में याचिकाओं के बढ़ते बोझ का बड़ा कारण है। जिला और सत्र न्यायाधीशों की श्रेणी से पदोन्नति के लिए 15 जज पात्र हैं, लेकिन आठ महीने तक नियमित मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति के कारण उनकी नियुक्ति रुकी हुई थी। अब कोलाजियम की सिफारिश से इनकी पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन कोलाजियम की सिफारिश की बाद भी लंबी और जटिल प्रक्रिया के कारण स्थिति में जल्द सुधार होने की संभावना नहीं है। कई चरण की मंजूरियों के बाद अंत में राष्ट्रपति की मुहर के बाद जाकर पदोन्नति देकर इन्हें हाईकोर्ट का जज बनाया जाना है।