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Panchkula News: पंचकूला कोर्ट परिसर में लेफ्टिनेंट कर्नल से मारपीट का आरोप, वकीलों पर केस दर्ज

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सैन्य अधिकारी ने बंधक बनाकर धमकाने और जबरन राजीनामे पर हस्ताक्षर कराने का लगाया आरोप, पुलिस ने शुरू की जांच
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन में तैनात एक लेफ्टिनेंट कर्नल ने पंचकूला जिला अदालत परिसर में कुछ वकीलों पर मारपीट, बंधक बनाकर धमकाने और जबरन राजीनामे पर हस्ताक्षर कराने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष चंदोक ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका पत्नी के साथ पारिवारिक विवाद चल रहा है और इस संबंध में फैमिली कोर्ट में तीन मामले लंबित हैं। 9 जुलाई को एक मामले की सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता मनिंदर सिंह बिट्टा और उनके साथियों ने कथित रूप से उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि सुनवाई समाप्त होने के बाद कोर्ट रूम के बाहर अन्य वकीलों को बुलाकर उनके साथ मारपीट की गई।
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शिकायत के अनुसार, इसके बाद उन्हें जबरन एक अधिवक्ता के चैंबर में ले जाया गया, जहां दोबारा मारपीट की गई। आरोप है कि उनसे कहा गया कि यदि उन्होंने समझौते (राजीनामे) पर हस्ताक्षर नहीं किए तो उन्हें वहां से जाने नहीं दिया जाएगा। शिकायतकर्ता का कहना है कि दबाव और भय के माहौल में उनसे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवा लिए गए, जिसे पढ़ने का अवसर भी नहीं दिया गया।
घटना के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल का सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल में मेडिकल कराया गया। प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (टेलबोन/कॉक्सिक्स) में चोट तथा फ्रैक्चर की आशंका जताई गई है। अंतिम चिकित्सीय राय का इंतजार किया जा रहा है।
सेक्टर-7 थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले में नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अदालत परिसर की सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। मेडिकल की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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कोट
9 जुलाई को फैमिली कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल ने मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया था। उनके लगाए सभी आरोप निराधार हैं। न कोई मारपीट हुई और न ही किसी प्रकार की बंधक बनाने की घटना। मामले की सच्चाई सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट हो जाएगी।
-मनिंदर सिंह बिट्टा, अधिवक्ता
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