चंडीगढ़। पीजीआई में ट्रांसलेशनल रिसर्च में नए ट्रेंड पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश-दुनिया के डॉक्टर सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और कार्ट टी सेल थेरेपी पर बात कर रहे हैं। कार्ट टी सेल थेरेपी को इम्यूनथेरेपी भी कहते हैं। अभी कार्ट टी सेल थेरेपी भारत के 40 अस्पतालों में हो रही है।
इसमें कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. गौरव नरूला भी मुंबई से पहुंचे। उन्होंने बताया कि वह मुंबई टीएमसी में कार्यरत हैं। वहां वह आईआईटी के साइंटिस्ट से 2015 में मिले थे। दोनों ने कार्ट टी सेल थेरेपी पर काम करना शुरू किया। उस समय दुनिया में केवल 4 जगह ही इस पर काम हो रहा था। 2017 में यह पहली बार यूएस में अप्रूव हुई। 2021 में यह भारत में भी बना ली गई।
फेज एक और दो ट्रायल के बाद अक्तूबर 2023 में इसे मार्केट में लाने की अप्रूवल मिल गई। इसे बड़ी उपलिब्ध माना जाता है। कार्ट टी सेल थेरेपी में मरीज के सेल लेकर उन्हें मोडिफाई किया जाता है ताकि वह सेल कैंसर को पहचान सकें। फिर उन्हें बड़ी मात्रा में तैयार करके वापस मरीज को दे दिया जाता है।
यह उन पर प्रयोग किया गया, जिनके पास कोई विकल्प नहीं था। यह वह मरीज थे जिनका बोन मैरो ट्रांसप्लांट होने और कीमो थैरेपी होने के बाद भी बीमारी वापस आ गई थी। उन पर यह ट्रायल किया गया था, वह आज तक सुरक्षित हैं। अभी कार्ट टी सेल थेरेपी भारत के 40 अस्पतालों में हो रही है। वह नई सेल एंड जीन थेरेपी बना रहे हैं जिस पर ट्रांसलेशन रिसर्च चल रहा है। 2025 में उस पर ट्रायल भी शुरू हो जाएंगे।
इस कॉन्फ्रेंस में ट्रांसलेशनल रिसर्च पर बात हो रही है कि जो साइंटिस्ट बना रहे हैं। उससे दुनिया में कैसे इलाज हो रहा है, उस पर बात की जा रही है। कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले सोमवार को एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया।