चंडीगढ़। विदेश में रह रहे दंपती द्वारा भारत मे रिश्तेदार से गोद लिए बच्चे के पासपोर्ट मामले में पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि अगर बच्चा हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनस एक्ट के तहत गोद लिया जा चुका है तो उसे जेजे एक्ट के तहत रजिस्टर करवाने की जरूरत नहीं है और सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी बच्चे के पासपोर्ट के लिए एनओसी जारी करने से इंकार नहीं कर सकती।
जस्टिस निर्मलजीत कौर ने यह फैसला एक एनआरआई दंपती द्वारा जालंधर में रह रहे अपने ही रिश्तेदार से गोद ली गई ढाई वर्ष की बच्ची का पासपोर्ट जारी करने की मांग को लेकर दायर याचिका को स्वीकार करते हुए सुनाया है। इंग्लैंड में रह रहे एक एनआरआई दंपती ने जालंधर में रह रहे अपने ही एक रिश्तेदार से नवंबर 2018 में एक बच्ची हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनस एक्ट के तहत गोद ली थी। जब दंपती ने अपने साथ ले जाने के लिए बच्ची के पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया तो अथॉरिटी ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि बिना सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी की एनओसी के पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता है। बाद में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी ने कहा कि बच्ची जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत गोद नहीं ली गई है, ऐसे में वह नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट नहीं दे सकते हैं।
सहयोग के लिए नियुक्त किया एमाइकस क्यूरी
हाईकोर्ट ने इस मामले में सहयोग दिए जाने के लिए एडवोकेट अनिल मल्होत्रा को एमाइकस क्यूरी नियुक्त कर दिया था। अनिल मल्होत्रा ने कहा कि गोद लिए बच्चे को विदेश में रह रहे उसके गोद लेने वाले माता- पिता ने जब हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनस एक्ट के तहत गोद ले चुके हैं तो जेजे एक्ट में गोद लेने की कोई जरूरत नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने अपनी सहमति जता दी। हाईकोर्ट ने सीएआरए को दो सप्ताह में बच्ची को एनओसी जारी करने और एनओसी जारी होने के दो सप्ताह में पासपोर्ट अथॉरिटी को बच्ची का पासपोर्ट जारी करने के आदेश दिए हैं।