चंडीगढ़। पंजाब के आईएएस अधिकारी विकास गर्ग, विवेक प्रताप सिंह और आईएफएस रमाकांत मिश्रा ने हाईकोर्ट की एकल बेंच द्वारा अवमानना का दोषी करार देने के आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने उन्हें बिना कोई राहत दिए सुनवाई सुनवाई 17 नवंबर तक स्थगित कर दी है। एकल बेंच ने तीनों को पक्ष रखने के लिए एक माह की मोहलत दी थी और 20 नवंबर को सजा पर फैसला सुनाया जाएगा।
2010 में गांव बड़ी करोरा और नाड्डा की 1092 एकड़ जमीन को पंजाब लैंड प्रिजार्वेशन एक्ट से डी-लिस्ट किया गया था और शर्त लगा दी गई थी की यहां कोई व्यावसायिक गतिविधि या कंस्ट्रक्शन नहीं होगी। इसके खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में स्थानीय लोगों ने याचिका दाखिल कर दी थी। 2014 में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि अगर यह वन भूमि नहीं है तो निर्माण न होने की शर्त यहां नहीं लगाई जा सकती और ऐसे में नए सिरे से अधिसूचना जारी की जाए।
हाईकोर्ट को बताया गया था कि आदेश के बावजूद पालन नहीं हुआ जिसके चलते लगातार हाईकोर्ट में याचिकाएं बढ़ती चली गईं। 12 अक्तूबर को हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेशों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने पर इन तीनों को अवमानना का दोषी करार दे दिया था। अब इन अधिकारियों सहित मोहाली की डीसी आशिमा जैन और गमाडा के एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर अमरिंदर सिंह टिवाना ने इस आदेश पर रोक लगाने की खंडपीठ से मांग की है। बुधवार करीब एक घंटे चली बहस के बाद हाईकोर्ट ने अब सुनवाई 17 नवंबर तक स्थगित कर दी है। हाईकोर्ट ने इस दौरान याचिकाकर्ताओं को किसी भी अंतरिम आदेश या राहत से इन्कार कर दिया।