पंचकूला। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग की ट्रेनिंग के बाद सर्टिफिकेट दिए जाने की योजना सराहनीय है। इसका व्यापारियों के साथ जनमानस को सीधा फायदा होगा। वहीं गुणवत्ता युक्त खाद्य पदार्थ बेचना व्यापारियों की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। हालांकि ज्यादातर व्यापारी शुद्ध और स्वच्छ खाना परोस रहे हैं, लेकिन कुछ लोग स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं हैं। ऐसे व्यापारियों का बहिष्कार होना चाहिए। यह बात ट्रेनर प्रदीप कुमार ने मोरनी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट वितरण समारोह में कही।
ट्रेनर प्रदीप कुमार ने बताया कि एफएसएसएआई के निर्देश पर हर खाद्य पदार्थ विक्रेताओं को प्रशिक्षण लेना जरूरी है। गैर लाइसेंसधारी व लाइसेंसधारी होटल, रेस्टोरेंट, बार संचालक भी प्रशिक्षण में शामिल होंगे। प्रशिक्षण के बाद प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। रजिस्ट्रेशन न कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2011 से लागू इस नियम पर सख्ती से अमल करने के आदेश एफएसएसएआई ने दिए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थ विक्रेताओं ने प्रशिक्षण प्रमाण पत्र नहीं दिखाया तो अन्न व औषधि विभाग की ओर से कार्रवाई होगी।
अब बिना सर्टिफिकेट नहीं कर सकेंगे कारोबार
किराना व्यवसायी से लेकर पकौड़े, फ्रूट्स बेचने वाले और बड़े होटल भी शामिल हैं, लेकिन अब यह मनमाने ढंग से खाद्य पदार्थ नहीं बेच सकेंगे। प्रशिक्षण के बाद एक प्रमाण पत्र और किट दी जा रही है। साथ ही साफ-सफाई रखने और गुुणवत्ता पूर्वक खाद्य वस्तुएं लोगों को उपलब्ध करवाने के बारे में जागरूक किया जा रहा है। हर प्रशिक्षु कारोबारी को गोल्डन रूल्स ऑफ एफएसएसएआई, हेड मास्क, एप्रेन और माऊथ मास्क भी प्रशिक्षण के दौरान प्रदान किया जा है। कारोबारी को रजिस्ट्रेशन करा कर तीन माह के अंदर हर कारोबारी को ट्रेनिंग लेनी होगी, जिसके पास यह सर्टिफिकेट नहीं होगा वह कारोबार नहीं कर सकेगा और सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।