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Panchkula News: डंडे पर मिले खून की पहचान नहीं हुई, बुजुर्ग की हत्या मामले में आरोपी बरी

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2022 में शंकर सिंह की हत्या के मामले में अदालत का फैसला, साक्ष्यों की कड़ी पूरी तरह साबित नहीं कर सका अभियोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पिंजौर में वर्ष 2022 में हुई बुजुर्ग शंकर सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी रणधीर सिंह उर्फ बबली को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ऐसे ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिनके आधार पर उसे संदेह से परे दोषी ठहराया जा सके। विशेष रूप से हत्या में इस्तेमाल किए जाने का दावा किए गए डंडे पर मिले खून की पहचान स्थापित नहीं हो सकी।

एक जुलाई 2022 को हुई थी हत्या
मामले के अनुसार, एक जुलाई 2022 को पिंजौर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव खोल मोला में खेतों के बीच बने कमरे में रहने वाले बुजुर्ग शंकर सिंह की हत्या कर दी गई है। सूचना पर पुलिस और सीन ऑफ क्राइम टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
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मृतक के बेटे ने पुलिस को बताया था कि उसके माता-पिता खेत में बने कमरों में रहते थे, जबकि वह गांव में रहता है। शिकायत के अनुसार, 30 जून की रात वह अपने माता-पिता को खाना देकर घर लौट गया था। अगले दिन सुबह जब वह चाय लेकर खेत पहुंचा तो उसके पिता चारपाई पर मृत पड़े थे और कमरे में खून फैला हुआ था। उसकी मां ने बताया था कि रात करीब तीन बजे रणधीर सिंह उर्फ बबली नशे की हालत में आया और शंकर सिंह के सिर पर डंडे से वार कर फरार हो गया।

दो जुलाई को हुई थी गिरफ्तारी
जांच के दौरान पुलिस ने दो जुलाई 2022 को रणधीर सिंह उर्फ बबली को गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा था कि आरोपी के घर से हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा बरामद हुआ है। इसके बाद अदालत में चालान पेश कर सुनवाई शुरू की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित करने का प्रयास किया, लेकिन अदालत ने पाया कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था। साथ ही आरोपी को घटना से पहले या बाद में मृतक के साथ देखे जाने संबंधी कोई ''लास्ट सीन'' साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया।
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एफएसएल रिपोर्ट भी नहीं बन सकी निर्णायक आधार
फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट में डंडे, मृतक के कपड़ों, रस्सी के टुकड़ों, कुर्ता, पायजामा, टी-शर्ट और पगड़ी पर ''ओ'' ब्लड ग्रुप का रक्त मिलने की पुष्टि हुई थी। हालांकि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि यह रक्त मृतक का था या आरोपी का। अदालत ने कहा कि केवल ''ओ'' ब्लड ग्रुप मिलने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बरामद डंडा हत्या में ही इस्तेमाल हुआ था, जब तक रक्त की स्पष्ट पहचान स्थापित न हो जाए। वहीं, मृतक के बेटे ने भी अदालत में स्वीकार किया कि उसने आरोपी को हत्या करते हुए नहीं देखा था। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकी और आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हुए। ऐसे में आपराधिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार संदेह का लाभ देते हुए रणधीर सिंह उर्फ बबली को बरी किया जाता है।
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