ट्रांसप्लांट गेम्स में हिस्सा लेने पहुंचे एथलीट
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आसमां में मत ढूंढ अपने सपनों को, सपनों के लिए तो जमीं जरूरी है,
सब कुछ मिल जाए तो जीने का क्या मजा, जीने के लिए एक कमी जरूरी है...
जी हां, जीने के लिए एक ऐसी कमी का होना भी जरूरी है जिसे पूरा करने के लिए जीने की ललक बढ़ जाए और वो कमी हमें मौत को मात देने के काबिल बना दे। मौत को हराकर एक बार फिर से नई जिंदगी की शुरूआत करने वालों ने बुधवार को पीजीआई के स्पोर्ट्स ग्राउंड में अलग ही अंदाज में जीने का फलसफा सिखाया। यहां आयोजित ट्रांसप्लांट गेम 20-20 में ऑर्गन लेने व देने वाले देशभर के लगभग 500 लोगों ने विभिन्न खेलों में भाग लिया।
इस दौरान बैडमिंटन, किक्रेट, रस्साकशी, कैरम, वॉक, दौड़, सिंगिंग, डांसिंग, पोस्टर मेंकिग व रंगोली बनाने के मुकाबले करवाए गए। अपनी सकारात्मक सोच और जिंदगी जीने के जज्बे से उन्होंने दिखा दिया कि वे बाकियों से कमतर नहीं कहीं बेहतर हैं। किडनी खराब होने के बावजूद 17 साल के साहिल ने गाना नहीं बंद किया तो 75 साल की उम्र में पत्नी को किडनी देने वाले मल्कीयत सिंह का जज्बा एक युवा से किसी मायने में कम नजर नहीं आया।