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बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में दाखिला आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को हरियाणा में बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने के फैसले पर रोक लगा दी है। सरकार ने लॉकडाउन के दौरान छात्रों के बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला लेने का प्रावधान किया था।
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याचिका दाखिल कर सर्व हरियाणा प्राइवेट स्कूल ट्रस्ट ने हाईकोर्ट को बताया कि लॉकडाउन के दौरान कई ऐसे छात्र थे, जिन्होंने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी में जाने का फैसला लिया। इन छात्रों ने मार्च 2020 से सरकारी स्कूलों में दाखिले की तिथि तक की लंबित राशि का भुगतान तक नहीं किया। याची ने बताया कि पहले तो सरकार ने छात्रों को 15 दिन के भीतर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि यदि निजी स्कूल 15 दिन के भीतर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी नहीं करते हैं तो इसे स्वयं ही जारी किया हुआ मान लिया जाएगा। याची ने कहा कि इस प्रकार तो स्कूलों की आर्थिक स्थिति और अधिक बिगड़ जाएगी।
याची ने बताया कि एमआईएस पर बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को सरकारी स्कूल का छात्र दिखाया जा रहा है जो सही नहीं है। लोग बिना लंबित राशि का भुगतान किए बच्चों का प्रवेश निजी स्कूलों से सरकारी में करवा रहे हैं। ऐसे में इस आदेश पर रोक की मांग की थी। हाईकोर्ट ने आदेश पर रोक लगाते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
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हजारों बच्चे छोड़ चुके स्कूल
एसएलसी की अनिवार्यता खत्म होेने के बाद हजारों बच्चे निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला ले चुके हैं। निजी स्कूलों में उन्होंने फीस जमा नहीं करवाई है। स्कूलों के सामने अब समस्या यह है कि वे ऐसे बच्चों से फीस कैसे वसूल करें। प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि सरकार बिना फीस भरे स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की राशि की प्रतिपूर्ति करे।
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