फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panchkula News: 19 करोड़ के जीएसटी घोटाला मामले में आरोपी की जमानत याचिका की खारिज

विज्ञापन
विज्ञापन
पंचकूला। एडिशनल सेशन जज नीरू कंबोज की अदालत ने 19.02 करोड़ रुपये के जीएसटी फर्जीवाडे़ में आरोपी अनिकेत वर्मा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कालका निवासी अनिकेत (26) पर फर्जी कंपनियों के माध्यम से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
विज्ञापन


इस मामले का खुलासा डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट की शिकायत के बाद हुआ, जो 10 जून को स्थानीय अदालत में दायर की गई थी। जांच के अनुसार आरोपी अनिकेत वर्मा ने कई फर्जी फर्मों का संचालन किया, जिनमें से एक मेसर्स बालाजी ट्रेडिंग कंपनी थी। यह फर्म हिमाचल के परवाणु में पंजीकृत थी, लेकिन अधिकारियों को दिए गए पते पर यह बंद मिली। यह फर्म फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने और उसे आगे ट्रांसफर करने में लिप्त थी।
जांच में यह आया सामने


जांच में पता चला कि अनिकेत अपने नाम पर दो और पत्नी के नाम पर एक फर्म चला रहा था। इन सभी फर्मों के जीएसटी पंजीकरण को अधिकारियों ने निलंबित कर दिया, क्योंकि ये बिना किसी वास्तविक सामान या सेवा की खरीद-बिक्री के फर्जी आईटीसी का लेन-देन कर रही थीं। मेसर्स एनवी इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन नाम की एक फर्म तो पंजीकृत पते पर मौजूद ही नहीं थी जबकि मेसर्स अनिकेत स्टील एंड ब्रदर्स का पंजीकरण जीएसटी रिटर्न फाइलिंग में अनियमितताओं के कारण निलंबित किया गया था। जांच से यह भी सामने आया कि माल की ढुलाई के लिए ई-वे बिलों में यात्री कारों, तिपहिया और मोटरसाइकिलों जैसे हल्के वाहनों का उपयोग दिखाया गया था जबकि उन पर सीमेंट और एमएस स्क्रैप जैसे भारी सामान की ढुलाई संभव नहीं है। इन तथ्यों से साफ होता है कि ये सभी लेन-देन सिर्फ कागजों पर थे और इनका मकसद सरकार से धोखाधड़ी से आईटीसी का लाभ उठाना था।
विज्ञापन

105.6 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों का उपयोग

जांच में पाया गया कि इन फर्मों ने कुल 105.6 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों का उपयोग किया। इसमें मेसर्स बालाजी ट्रेडिंग कंपनी को 69.27 करोड़ रुपये के फर्जी बिल मिले। मेसर्स अनिकेत स्टील एंड ब्रदर्स को 33.44 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जबकि मेसर्स एनवी इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन को केवल एक व्यावसायिक ऋण प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाया गया था। इन फर्जी बिलों के आधार पर अनिकेत ने तीन फर्मों के माध्यम से कुल 19.02 करोड़ रुपये का आईटीसी लिया।

आरोपी के वकील का तर्क- झूठा फंसाया गया

अदालत में आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसे झूठा फंसाया गया है और वह 12 अप्रैल 2025 से हिरासत में है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जांच अभी भी जारी है और इस मामले में आरोपी के भाई सहित अन्य सह-आरोपियों की गिरफ्तारी होना बाकी है। अदालत ने मामले की गंभीरता और आर्थिक अपराध को देखते हुए कहा कि आरोपी को जमानत देने का ठोस आधार नहीं है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें