पंचकूला। एडिशनल सेशंस जज नीरू कंबोज की अदालत ने 72 करोड़ रुपये के एचएसवीपी (पूर्व में हुडा) घोटाले में आरोपी यश बिंदल की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मामला करोड़ों के सार्वजनिक धन के गबन से जुड़ा है, जांच अभी लंबित है और आरोपी के फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है।
यह मामला सेक्टर-7 थाने में 7 मार्च 2023 को दर्ज एफआईआर से संबंधित है। ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ था कि 2015 से 2019 के बीच पंजाब नेशनल बैंक, मनीमाजरा में एचएसवीपी के नाम से एक फर्जी खाता खोला गया। इस खाते से करीब 72.13 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए। जांच में सामने आया कि यह खाता तत्कालीन कैश ब्रांच के अकाउंट्स अफसर सुनील कुमार बंसल के मोबाइल नंबर और ईमेल से ऑपरेट होता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी यश बिंदल के खाते में भी करीब एक करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे, जिनमें से लाखों रुपये उसके भाई संजीव बिंदल की फर्मों को भेजे गए। ईडी ने छापेमारी के दौरान यश बिंदल के घर से 19 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी का भाई संजीव बिंदल अभी फरार है और अगर जमानत दी गई तो वह उसकी गिरफ्तारी में बाधा डाल सकता है। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यश बिंदल निर्दोष है, उसका खाता उसके भाई ने गलत तरीके से इस्तेमाल किया और ईडी ने भी उसे आरोपियों की सूची में शामिल नहीं किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़े हैं। वहीं आरोपी खुद कथित तौर पर लाभार्थी रहा है और उसका भाई अभी गिरफ्त से बाहर है। ऐसे में इस समय जमानत देना उचित नहीं है।