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पंजाब यूनिवर्सिटी में 200 से अधिक कर्मियों को बैकडोर एंट्री से किया परमानेंट, करोड़ों का घोटाला

Thu, 26 Sep 2019 12:06 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी में 200 डेली वेजिज कर्मियों की बैकडोर एंट्री कर उन्हें गलत तरीकों से स्थाई कर दिया। इसके कारण जिन कर्मियों की सैलरी 5000 हजार रुपये थी आज वह स्थाई होने के बाद 40 से 50 हजार रुपये वेतन ले रहे हैं। इन कर्मियों को स्थाई करने के नाम पर पंजाब यूनिवर्सिटी के खजाने से करोड़ों रुपये सैलरी के रूप में इन्हें दे दिए गए। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने केवल एक बार ही डेली वेजिज कर्मियों को स्थाई कर यह लाभ देने के आदेश दिए थे, लेकिन पीयू की सिंडिकेट व सीनेट ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दो बार लाभ दिया।
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ये बनाया गया स्थाईकरण का आधार
31 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की उमा देवी केस में निर्णय सुनाया। आदेश दिए कि जिन डेली वेजिज कर्मियों को दस साल काम करते किसी कार्यालय में हो गए हों और उनकी नियुक्ति प्रोपर तरीकों से हुई है तो उन्हें स्थाई कर दिया जाए। आदेश यह भी दिया था कि एक संस्थान में एक ही बार इन कर्मियों को लाभ दिया जाएगा चाहे उसमें कितने ही डेली वेजिज कर्मचारी शामिल हों।

यह आदेश आते ही देशभर में डेली वेजिज कर्मियों को एक बार स्थाई किया गया, लेकिन उससे पहले यह देखा गया कि उन कर्मियों की भर्ती विज्ञापन के तहत हुई है या नहीं, साक्षात्कार हुआ कि नहीं। प्रोपर नियमों का पालन करने के बाद कर्मचारियों को लाभ दिया गया। लाखों की संख्या देशभर में कर्मियों को इस आदेश से लाभ मिला।
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पीयू ने इस तरह किया खेल

पीयू ने भी इसी आदेश के मुताबिक सूची तैयारी की और लगभग 150 डेली वेजिज कर्मचारियों को वर्ष 2011 में स्थाई कर दिया। हैरत इस बात की है कि इन कर्मचारियों की भर्ती के लिए न कोई विज्ञापन जारी हुआ और न कोई साक्षात्कार हुआ। इसका खुलासा एआर एस्टेट कार्यालय से जारी आरटीआई में हुआ है। दो बार मांगी गई आरटीआई में साफ लिखा है कि एक जनवरी 1985 से लेकर 31 दिसंबर 1994 तक व एक जनवरी 1995 से लेकर दिसंबर 2006 तक कोई भी विज्ञापन डेली वेजिज कर्मियों की भर्ती के लिए नहीं निकाला गया।

अब सवाल यह उठता है कि बिना विज्ञापन या प्रोपर सिलेक्शन के बिना इन कर्मियों को किस आधार पर स्थाई किया गया। यदि वर्ष 2006 के बाद इनकी सेवा को प्रोपर सलेक्शन माना गया तो फिर वर्ष 2011 तक कैसे इन कर्मचारियों की सेवा कैसे दस साल हुई? इससे पीयू प्रशासन कटघरे में खड़ा है। यही नहीं पीयू की सिंडिकेट व सीनेट ने वर्ष 2015 में फिर डेली वेजिज कर्मियों को स्थाई कर दिया। इनकी संख्या लगभग 50 थी। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट सभी नियम तार-तार कर दिए। उस दौरान सीनेटर डॉ. एसके शर्मा समेत कई सदस्यों ने इसका विरोध किया।

कहा कि बैकडोर से एंट्री की गई हैं, इन्हें स्थाई न किया जाए। जानकारों का कहना है कि अब तीसरी बार भी डेली वेजिज कर्मियों को फिर से लाभ देने की तैयारी चल रही है। हालांकि मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है।
 
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स्थाई किए गए पदों में ये शामिल

- क्लर्क
- माली
- चपरासी
- चौकीदार
- हेल्पर

एक-एक परिवार के 40 सदस्य कर रहे हैं नौकरी
पीयू में डेली वेजिज कर्मियों की लगातार बैकडोर एंट्री होती रही। भाई-भतीजावाद चलता रहा। यही कारण रहा कि एक-एक परिवार के 40 से 45 सदस्य हैं जो पीयू में ही नौकरी कर रहे हैं और वह स्थाई हुए। वीसी कार्यालय में भी ऐसे कर्मचारी शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि बैकडोर एंट्री चल रही है। इसके नाम पर खेल हो रहा है। कुछ कर्मचारी नेताओं पर व एक-दो सीनेटरों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्थाई किए गए कर्मियों से धन की वसूली चल रही है।

मामला तो गंभीर है लेकिन मुझे इस प्रकरण की जानकारी नहीं है, इसे दिखवाया जाएगा।
- प्रो. शंकरजी झा, प्रभारी वाइस चांसलर
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