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ऑडियो क्लिप विवाद: पंजाब निर्वाचन आयोग जांच में तेजी लाए, 48 घंटे में दे रिपोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को पंजाब राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जिला परिषद चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों व वायरल ऑडियो क्लिप मामले की जांच में तुरंत तेजी लाई जाए। अदालत ने आयोग को 48 घंटे में जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि आवश्यक हो तो ऑडियो की फोरेंसिक जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए।
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चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ शिरोमणि अकाली दल नेता दलजीत सिंह चीमा और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि कई जिलों में रिटर्निंग अधिकारियों व पुलिस ने विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से प्रणालीबद्ध रूप से रोका जिसके चलते बड़ी संख्या में नामांकन जांच के दौरान खारिज कर दिए गए।
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि 4 दिसंबर की सुबह करीब साढ़े 9 बजे शिरोमणि अकाली दल के लेटर हेड पर पटियाला के एसएसपी के विरुद्ध शिकायत मिली। इसे तत्काल डीजीपी को जांच के लिए भेजा गया और 2 बजे तक रिपोर्ट मांगी गई। पटियाला रेंज के डीआईजी ने सूचित किया कि सोशल मीडिया पर फर्जी एआई-जनरेटेड ऑडियो के प्रसार के आरोप में आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच एडीजीपी स्तर के अधिकारी एसपीएस परमार को सौंपी गई है। इसके अलावा निष्पक्ष चुनाव के लिए 23 इलेक्शन ऑब्जर्वर और छह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
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याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि मामला मात्र ऑडियो क्लिप तक सीमित नहीं बल्कि एसएसपी के कथित निर्देशों के कारण कई ब्लॉकों में विपक्षी उम्मीदवारों को केंद्रों तक पहुंचने ही नहीं दिया गया। कोर्ट को बताया गया कि मजीठा में 33 में से 21, राजा सांसी में 35 में से 25 और तरनतारन में 32 में से 32 नामांकन खारिज किए गए हैं। याची ने कहा कि कई उम्मीदवारों को घरों से निकलने नहीं दिया गया या गांवों से 5 किलोमीटर पहले ही पुलिस ने रोक दिया।
पंजाब सरकार ने कहा कि सिर्फ 10 प्रतिशत नामांकन ही रद्द किए गए हैं और तस्वीर तोड़-मरोड़ कर पेश की गई है। प्रदेश में 12,354 नामांकन दाखिल हुए, जिनमें से केवल 1,265 खारिज हुए जो 10 प्रतिशत से भी कम है। वायरल ऑडियो का राजनीतिक प्रचार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और शिकायतकर्ता द्वारा मूल डिवाइस जांच को देने से इन्कार किया गया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आयोग से पूछा कि क्या जांच अधिकारी आयोग की निगरानी में काम कर रहे हैं। आयोग ने कहा कि डीजीपी इस जांच के लिए आयोग को रिपोर्ट कर रहे हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि आवश्यक हो तो ऑडियो की फोरेंसिक जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए।
ई नॉमिनेशन की मांग, हाईकोर्ट का नोटिस

जिला परिषद चुनाव में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोकने के लिए सत्ताधारी दल पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने के आरोपों के बीच इससे बचने के लिए ई नॉमिनेशन प्रक्रिया अपनाने का निर्देश जारी करने की हाईकोर्ट से अपील की गई है। याची ने कहा कि इससे उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के अवैध प्रयासों पर लगाम लगाई जा सकेगी। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
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