पंचकूला। सेक्टर-5 के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में ‘हमारे राम’ के मंचन में रविवार को शाम बाॅलीवुड कलाकार आशुतोष रणा के डाॅयलाॅग गूंजे। दर्शकों की भारी भीड़ ने पूरे तीन घंटे तक त्रेतायुग की यात्रा का अद्भुत अनुभव लिया। नाटक की शुरुआत भगवान राम के दरबार में लव-कुश के संवाद और माता सीता के धरती में समा जाने के करुण प्रसंग से हुई। संवाद के दौरान आशुतोष राणा समय-समय पर दर्शकों से सीधा संवाद करते रहे। वहीं राम की भूमिका निभा रहे राहुल आर भुचर ने वनवास प्रसंग में सीता से संवाद करते हुए दर्शकों से हंसी-मजाक में पूछा आप ही बताइए क्या जीत सका है कोई अपनी पत्नी से। इस पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। दृश्य पृष्ठभूमि पर चल रहे डिजिटल दृश्य उस कालखंड की वास्तविकता का गहन एहसास कराते रहे।
रावण की तपस्या से छाया सभागार में सन्नाटा
भगवान राम की मर्यादा पर लव-कुश के सवालों के बाद लक्ष्मण की ओर से सूर्य देव का आह्वान किया गया। मंच पर लंकाधिपति रावण के रूप में आशुतोष राणा का प्रभावी प्रवेश हुआ। रावण की शिव स्तुति पाठ जटाओं से है जिनके जलप्रवाह माते गंग का, गले में जिनके सज रहा है हार विष भुजंग का, से पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो उठा। अंतिम आहुति में नारियल न मिलने पर रावण की ओर से अपना शीश अर्पित करने के दृश्य ने दर्शकों से तालियां बजाने को मजबूर कर दिया। इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव के प्रकट होने और रावण को दस शीश एवं बीस भुजाओं का वरदान देने पर पूरा रुद्राक्ष प्रांगण हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। मंच पर संवाद के दौरान आशुतोष राणा समय-समय पर दर्शकों से सीधा संवाद करते रहे। वहीं राम की भूमिका निभा रहे राहुल आर भुचर ने वनवास प्रसंग में सीता से संवाद करते हुए दर्शकों से हंसी-मजाक में पूछा -आप ही बताइए, क्या जीत सका है कोई अपनी पत्नी से। इस पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। पृष्ठभूमि पर चल रहे डिजिटल दृश्य उस कालखंड की वास्तविकता का गहन एहसास कराते रहे।
कलाकारों ने जीवंत किए पात्र
रावण - आशुतोष राणा
राम - राहुल आर. भुचर
हनुमान - दानिश अख्तर
भगवान शिव - तरुण खन्ना
माता सीता - हरलीन कौर रेखी
सूर्य देव - करण शर्मा