पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वाहन पर कलात्मक पेंट करना उसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की श्रेणी में नहीं आता है। हाईकोर्ट ने दिल्ली से खरीदी गई एंबेसडर कार का 2 सप्ताह के भीतर रजिस्ट्रेशन करने का यूटी प्रशासन को आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता रणजीत मल्होत्रा ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने दिल्ली से एंबेसडर कार यूरोपियन यूनियन के काउंसलर से खरीदी थी। इस कार को खरीदने का कारण इस कार पर मैक्सिकन आर्टिस्ट सैनकोई द्वारा किया गया आर्ट वर्क था।
जुलाई 2019 में खरीदी गई कार के रजिस्ट्रेशन के लिए यूटी प्रशासन को आवेदन किया गया लेकिन इंस्पेक्टर ने यह कह कर कार के रजिस्ट्रेशन की अनुमति देने से इंकार कर दिया कि कार का असल रंग सफेद था जिस पर अब पेंट कर दिया गया है और यह कार के वास्तविक स्वरूप में परिवर्तन की श्रेणी में आता है।
बचाव करते हुए यूटी प्रशासन के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल पंकज जैन ने कहा कि अभी तक रजिस्ट्रेशन के आवेदन पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, ऐसे में यह याचिका प्रीमेच्योर है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार कार के असल रंग में परिवर्तन करना उसके मूल रूप से छेड़छाड़ करने की श्रेणी में आता है।
अक्सर ट्रकों पर विभिन्न स्लोगन व डिजाइन जैसे ‘हम दो हमारे दो’, ‘ओके टाटा’, ‘हॉर्न प्लीज’ आदि बने होते हैं। कारों के पीछे विभिन्न तरह के डिजाइन बने होते हैं। इनको वाहन के मूल स्वरूप में छेड़छाड़ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे कैनवास पर रंगों के माध्यम से विभिन्न तरह की पेंटिंग बनाई जाती हैं जिससे कैनवास का मूल स्वरूप प्रभावित नहीं होता है।
वैसे ही इस समय कार का मूल रंग सफेद है जिस पर पेंट किया गया है। ऐसे में इसे वाहन के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। हाईकोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए यूटी प्रशासन को 2 सप्ताह में वाहन का रजिस्ट्रेशन करने के आदेश जारी किए हैं।