अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कई राज्यों से चंडीगढ़ में जुटे सेना के पूर्व अफसरों ने बैठक के दाैरान विभिन्न मसलों पर चर्चा की और अपनी मांगों से संबंधित एक प्रस्ताव पारित किया। इसके माध्यम से उन्होंने सरकार को कुछ सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने मांग की कि आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) को शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) अधिकारियों की पेंशन मामलों की सुनवाई का अधिकार दिया जाए। जिससे करीब 10 हजार पूर्व सैनिकों को राहत मिल सके। इसके साथ एक स्वतंत्र आयोग के गठन का भी सुझाव दिया गया जो एसएससी अधिकारियों की शिकायतों और विवादों का समाधान करे। जिससे उन्हें अलग-अलग सिविल अदालतों का दरवाजा न खटखटाना पड़े।
लेफ्टिनेंट कर्नल जीपीएस विर्क (वेटरन) ने कहा कि शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी हमारी सशस्त्र सेनाओं की रीढ़ रहे हैं। उन्होंने हर क्षेत्र में समान योगदान दिया है। फिर चाहे वो ऑपरेशन हों, चिकित्सा सेवाएं हों या प्रशासनिक कामकाज। दुर्भाग्यवश उन्हें पेंशन, मेडिकल और रि-सेटलमेंट नीतियों में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। लिहाजा हम उनके लिए समानता और सम्मान की मांग कर रहे हैं।
चंडीगढ़ पहुंचे शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों के संदर्भ में सरकार से न्याय की अपील की और चुनौतियों पर चर्चा की। इस दाैरान अधिकारियों ने सरकार से वन रैंक-वन पेंशन (ओआरओपी) का लाभ सभी एसएससी अधिकारियों, विशेषकर विशेषज्ञ डॉक्टरों तक बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था कि उन्होंने स्थायी कमीशन अधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर मोर्चे पर सेवा की है, इसलिए उनके साथ भेदभाव अनुचित है।
उन्होंने उनके परिवारों को ईसीएचएस जैसी मेडिकल सुविधाएं देने की भी मांग उठाई। अधिकारियों ने संसद में जल्द से जल्द रि-सेटलमेंट एंड आर्म्ड फोर्सेज वेलफेयर एक्ट पारित करने की भी अपील की जिससे पूर्व सैनिकों, विशेष रूप से अल्पकालिक सेवा देने वालों के पुनर्वास और कल्याण को कानूनी ढांचा मिल सके। इस दाैरान लेफ्टिनेंट कर्नल गुरप्रकाश सिंह विर्क, कैप्टन आरके भारद्वाज, मेजर डॉ. आरवी भारत, मेजर राजीव पंवार समेत 50 से अधिक अधिकारी माैजूद रहे।