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अपील : गोशालाएं गोबर आधारित उत्पाद बनाकर उसका प्रचार करें, गाय और अर्थव्यवस्था विषय पर आयोजित ऑनलाइन सेमिनार को राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के चेयरमैन ने किया संबोधित

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पंचकूला। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के पूर्व चेयरमैन बल्लभ भाई कथिरिया ने कहा कि भारत सदा से ही कृषि प्रधान देश रहा है। यह कृषि प्रणाली भारत में गोवंश आधारित होती थी। गाय और अर्थव्यवस्था विषय पर हरियाणा गो सेवा आयोग द्वारा गाय आधारित वेबिनार का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि गाय दूध तो वर्ष में लगभग छह महीने ही देती है, लेकिन उसका गोबर और मूत्र प्रतिदिन मिलता है। गो उत्पादों की आजकल बाजार में खूब मांग है। गोशालाओं को चाहिए कि गाय के गोबर आधारित उत्पाद बनाएं और बाजारों में मार्केटिंग करें।
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कथिरिया ने कहा कि देशभर में गोवंश 4 टन प्रतिवर्ष की दर से 120 करोड़ टन गोबर और 80 करोड़ किलो लीटर गोमूत्र देता है। इसका सदुपयोग करके गाय को आम जनमानस के साथ जोड़ें। वेबिनार की अध्यक्षता कर हरियाणा गो सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग ने कहा कि गाय का असली स्थान गोपालक का घर है। भगवान श्री कृष्ण ने गोपालन किया तो तभी वह गोपाल कहलाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कई गोशालाएं बहुत ही उत्तम कार्य कर रही हैं। प्रदेश की अनेक गोशालाओं द्वारा दुग्ध उत्पाद और पंचगव्य, गोबर, गोमूत्र से बने उत्पादों का उत्पादन किया जा रहा है।
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