कैप्टन ने कहा कि अब उन्होंने मेरे किसानों के साथ जो कुछ किया है, अब मुझे उनके साथ बिल्कुल भी बात नहीं करनी। चाहे 10 बार कोशिश करके देख लें। मेरा मनोहर लाल के साथ बात करने का कोई मतलब नहीं बनता, भले ही वह पड़ोसी है या नहीं। जब तक मनोहर लाल माफी नहीं मांगते और यह नहीं मान लेते कि मैंने पंजाब के किसानों के साथ गलत किया, मैं उन्हें माफ नहीं करूंगा।
पंजाब और दिल्ली के बीच टांग अड़ाने वाले मनोहर लाल कौन : कैप्टन
कैप्टन ने किसानों को राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण तरीके से जाने देने की इजाजत न देने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार किसानों के साथ बातचीत के लिए तैयार है और यहां तक कि दिल्ली सरकार को उनके आने पर कोई ऐतराज नहीं है तो इनके बीच टांग अड़ाने वाले मनोहर लाल कौन होते हैं।
पूरे मसले में दखलंदाजी से मनोहर लाल का क्या लेना-देना है। कैप्टन ने मनोहर लाल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उसका कहना है कि पंजाब के मुख्यमंत्री किसानों को आंदोलन के लिए भड़का रहे हैं। इस पर कैप्टन ने कहा कि मैं तन-मन से राष्ट्रवादी हूं। मैं सरहदी राज्य चलाता हूं और ऐसा कुछ कभी भी नहीं किया, जिससे कानून-व्यवस्था के लिए मुश्किल पैदा होती हो। मैं मनोहर लाल की बेतुकी बातों का कोई जवाब नहीं दूंगा। क्या मेरे पास किसानों को भड़काने के अलावा कोई अन्य काम नहीं है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के इस दावे को कि हरियाणा के किसान दिल्ली चलो आंदोलन का हिस्सा नहीं थे, को हास्यास्पद करार देते हुए कैप्टन ने कहा कि पंजाब की खुफिया जानकारी से पता चला है कि पड़ोसी राज्य के करीब 40000-50000 किसान राष्ट्रीय राजधानी की तरफ मार्च में शामिल हुए। मनोहर लाल नहीं जानते कि उनके अपने राज्य में क्या हो रहा है और वह मुझे बता रहे हैं कि मुझे अपने राज्य में क्या करना है।
इसलिए नहीं रोका किसानों को : कैप्टन
कैप्टन ने कहा कि वह जानते हैं कि किसान क्या महसूस कर रहे हैं, इसीलिए उन्होंने किसानों को राज्य से बाहर मार्च करने और रेलवे ट्रैकों पर बैठने से नहीं रोका। यह बताते हुए कि किसानों ने रेल नाकाबंदी हटाने से पहले ही दिल्ली जाने का अपना फैसला सुना दिया था। उन्होंने कहा कि वह इसमें कैसे पड़ सकते थे।
मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की कि आंदोलनकारी किसान, जिसमें बड़ी संख्या में नौजवान शामिल हैं, अपने दिल से बोल रहे हैं, वह अपने दिल की आवाज सुन रहे हैं। यह उनके भविष्य, उनके जीवन का सवाल है, वह कृषि कानूनों पर नाराज हैं, जो मंडियों और आढ़तियों की 100 साल पुरानी प्रणाली को खत्म करने की बात करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि वह किसान संघर्ष के पीछे होने संबंधी बेबुनियाद आरोपों को स्वीकार नहीं करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भी चाहते हैं कि मसले का निपटारा हो और टकराव खत्म हो और वह मसले के हल के लिए जो सहायता कर सकते हैं, वह करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा इस मामले पर बनी पेचीदगी को खत्म करने के लिए किसी भी कोशिश की हिमायत करने के लिए वह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को किसानों के साथ बातचीत करके इसका हल ढूंढना पड़ेगा।
बातचीत के लिए अमित शाह की अपील मानें किसान : कैप्टन
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों से कहा है कि वे केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा रोष प्रदर्शन के लिए निश्चित की गई जगह पर जाने की अपील को स्वीकार कर लें ताकि बातचीत जल्द शुरू करने का रास्ता साफ हो सके। अमित शाह ने किसानों के साथ जल्द चर्चा करने की पेशकश पर कैप्टन ने कहा कि यह किसान समुदाय और मुल्क के हित में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शाह ने तीन दिसंबर से पहले किसानों के साथ बातचीत करने की पेशकश की है और उनका बयान यह दिखाता है कि केंद्र किसानों का पक्ष सुनने के लिए तैयार है, जो स्वागत योग्य कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री यह स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत सरकार किसानों के साथ प्रत्येक समस्या और मांग पर बातचीत करने को तैयार है और निर्धारित जगह पर शिफ्ट होने से अगले दिन ही बातचीत की जाएगी तो इस संबंध में किसान नेताओं को भी आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर ही समस्या का हल निकाल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान बिना किसी देरी के केंद्र को बातचीत के मेज पर लाकर आधी लड़ाई पहले ही जीत चुके हैं। कैप्टन ने दोहराया कि वह और उनकी सरकार केंद्र और किसानों के बीच बातचीत के मामलों में पूरा समर्थन देने के लिए तैयार है और सभी के सामूहिक हित में मध्यस्थता करने के लिए राजी है। उन्होंने कहा कि समस्या का जल्द हल निकालना पंजाब और हर पंजाबी के हित में है।