पीजीआई एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर (एपीसी) के प्रमुख प्रो. सुरजीत सिंह को प्रो. जगतराम के सेवानिवृत्त होने पर प्रभारी निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह एक नवंबर से नए निदेशक की तैनाती तक इस पद को संभालेंगे। स्वास्थ्य मंत्री और संस्थान की कमेटी के अध्यक्ष मनसुख मंडाविया ने शनिवार की दोपहर यह घोषणा की।
गौरतलब है कि प्रो. सुरजीत सिंह इससे पहले पीजीआई के प्रभारी डीडीए का भी कार्यभार संभाल चुके हैं। इससे साफ है कि प्रो. सुरजीत सिंह को क्लीनिकल के साथ प्रशासनिक कार्यों का बखूबी अनुभव है। वह पीजीआई के बाल रोग विभाग के प्रमुख के साथ ही आईसीएमआर सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन प्राइमरी इम्यूनोडेफिशिएंसी डिजीज में एलर्जी इम्यूनोलॉजी यूनिट के प्रधान अन्वेषक भी हैं।
प्रो. जगतराम की ही तरह इन्हें भी अपने क्षेत्र में महारथ हासिल है। कावासाकी रोग पर उनका रिसर्च विश्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 2015 में इस बीमारी पर प्रकाशित उनके शोध में उन्होंने यह बात सामने लाई थी कि कावासाकी रोग (केडी) बचपन का वास्कुलिटिस है और उत्तरी अमेरिका, यूरोप और जापान में बाल चिकित्सा में हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण है।
उन्होंने आगाह किया था कि यह भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है। इस पर अगर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह बच्चों में हृदय रोग के सबसे आम कारण बन सकता है। इस विकार का वर्णन पहली बार 1967 में जापान में डॉ. टोमिसाकु कावासाकी द्वारा किया गया था। इसलिए इसका नाम कावासाकी डिजीज है।