चंडीगढ़। भगवंत मान सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू की गई मुहिम पर सवालिया निशान लगाते हुए सीनियर कांग्रेस नेता और पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि यह मुहिम केवल विपक्ष के नेताओं खासकर कांग्रेस लीडरशिप के खिलाफ चलाई गई है। बाजवा ने वीरवार को एक बयान में कहा कि जब आम आदमी पार्टी (आप) सत्ता में आई और भगवंत मान मुख्यमंत्री बने तो उम्मीद थी कि वह विपक्ष से भेदभाव नहीं करेंगे, खास तौर पर भ्रष्टाचार के मामलों में। लेकिन भगवंत मान सरकार विपक्ष से भेदभाव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सात माह पुरानी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम पूरी तरह एकतरफा साबित हुई है और केवल कांग्रेस लीडरशिप को घेरने पर तुली है।
बाजवा ने कहा कि मान सरकार ने कैबिनेट मंत्री फौजा सिंह सरारी के मामले में चुप्पी साध ली है, जिनकी अपने ओएसडी तरसेम लाल कपूर की मदद से सरकारी अफसरों से पैसा वसूलने की ऑडियो क्लिप करीब एक माह पहले वायरल हुई थी। उन्होंने कहा कि भगवंत मान अपने कैबिनेट साथी को बचाने की कोशिशों में लग गए हैं, जबकि कांग्रेस के सीनियर नेता कैप्टन संदीप संधू और गुरदासपुर के विधायक बरिंदरमीत सिंह पहाड़ा जैसे नेताओं के पीछे विजिलेंस ब्यूरो को लगा दिया है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले बिना सबूत के कांग्रेस के सीनियर मंत्रियों के खिलाफ विजिलेंस ने केस दर्ज करके गिरफ्तारियां की हैं। बाजवा ने यह भी कहा कि भगवंत मान भाजपा के नेताओं के प्रति पूरी तरह से दयालू हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो जांच एजेंसियों से सुरक्षित रहने के लिए भगवा पार्टी में चले गए थे। बाजवा ने सवाल किया कि आप के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ भगवंत मान ने क्या कार्रवाई की? बाजवा ने आप विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा और जसवंत सिंह गज्जनमाजरा, रमन अरोड़ा और शीतल अंगुराल को लेकर भी मुख्यमंत्री पर सवाल दागे।