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विपक्ष की एकजुटता से पहले ही पड़ गई फूट, कानून व्यवस्था पर विपक्ष की आल पार्टी मीटिंग स्थगित

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चंडीगढ़। पंजाब में लगातार बिगड़ती कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए सभी विपक्षी दलों का राज्य सरकार के खिलाफ एकजुट होने का प्रयास विफल हो गया है। शुक्रवार को पंजाब भवन में दोपहर बाद बुलाई गई कांग्रेस, भाजपा, शिअद, सीपीआई, सीपीआई (एम), संयुक्त अकाली दल, बसपा और अन्य छोटे दलों की संयुक्त बैठक को स्थगित करने का एलान सुबह ही कर दिया गया। इसके साथ ही विपक्ष की एकजुटता से पहले ही फूट पड़ गई है। वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा और शिअद इस मुद्दे पर उनके साथ नहीं आए।
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इस संबंध में पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि आरंभिक सहमति के बावजूद भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने शुक्रवार को होने वाली आल पार्टी बैठक को स्थगित करने की मांग की। इसके चलते यह बैठक स्थगित कर दी गई है। राजा वड़िंग ने हालांकि अपने ट्वीट में सीधे तौर पर भाजपा व शिअद को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन ऑल पार्टी बैठक कितनी महत्वपूर्ण थी, यह जताते हुए लिखा कि पंजाब की सुरक्षा और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का मुद्दा अहम है और इस पर जल्द कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने आगे लिखा कि दुखद है कि आरंभिक सहमति के बावजूद, भाजपा और अकाली दल ने बैठक स्थगित करने की मांग की।
पंजाब कांग्रेस के प्रवक्ता के अनुसार, अन्य पार्टियों की सहमति से ही आल पार्टी मीटिंग बुलाई गई थी, लेकिन भाजपा और अकाली दल ने पहले सहमति देने के बाद इसे स्थगित करने की मांग की, जिसके चलते बैठक स्थगित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यह बैठक बुलाए जाने के आसार हैं। दूसरी ओर, भाजपा और अकाली दल के नेताओं ने आल पार्टी मीटिंग स्थगित किए जाने के अपने अनुरोध के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी साफ नहीं किया कि यह बैठक अब आने वाले समय में कब होगी। वहीं, कांग्रेस के नेताओं ने भी मामले में टिप्पणी से इनकार कर दिया। लेकिन बैठक स्थगित होने के साथ ही यह साफ हो गया कि सभी विपक्षी दल अपने बल पर कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर सियासी मुहिम जारी रखना चाहते हैं।
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उल्लेखनीय है कि पंजाब में बिगड़ रही कानून-व्यवस्था की स्थिति के मद्देनजर विपक्षी दलों ने प्रदेश को मौजूदा हालात से उभारने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से बैठक बुलाने का फैसला किया था। सभी दल इस बात पर सहमत थे कि सरकार को कानून-व्यवस्था की स्थित पर जवाबदेह बनाया जाए। सभी दलों का कहना था कि पंजाब में आए दिन हो रही हत्याओं और लूट की वारदात के चलते जनता में भय और असुरक्षा की भावना फैलने लगी है। यह भी गौरतलब है कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस ने पंजाब के राज्यपाल से भी अलग-अलग समय मुलाकात की थी।
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