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लापरवाही: कोरोना पेशेंट की मौत अंबाला और पंचकूला स्वास्थ्य विभाग ने दी अलग- अलग रिपोर्ट

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पंचकूला। कालका के कोरोना पेशेंट की मौत के मामले में अंबाला स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विभाग ने पहले जिंदा मरीज की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव दी और मरने के बाद निगेटिव करार दे दिया। लापरवाही का खुलासा तब हुआ जब मरीज की मौत हो गई और उसके बेटे के हाथ में कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट आई। जैसे ही इस मामले की भनक हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लगी हड़कंप मच गया और वह पूरे मामले को दबाने की जुगत लगाने में जुट गए। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है और जांच के आदेश जारी किए हैं। जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, कालका निवासी मृतक का सेक्टर-25 श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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कालका निवासी मृतक विनोद मित्तल (58) के बेटे अभिनव ने अंबाला स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पिता विनोद मित्तल की 25 जुलाई को अचानक तबीयत बिगड़ गई। वह उन्हें उपचार के लिए अंबाला निजी अस्पताल में लेकर गए। जहां से कोरोना टेस्ट के लिए सरकारी अस्पताल में भेज दिया गया। सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि टेस्ट की रिपोर्ट 24 घंटे बाद मिलेगी।
इसके बाद निजी अस्पताल में जब पिता की हालत और गंभीर हो गई तो डॉक्टरों ने पंचकूला सेक्टर-21 स्थित एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। इसके बाद अंबाला स्वास्थ्य विभाग ने 27 जुलाई को पंचकूला स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट दी कि विनोद मित्तल पॉजिटिव हैं। इसी के आधार पर पंचकूला स्वास्थ्य विभाग ने अपने बुलेटिन में इसे शामिल कर लिया। जबकि मौत के बाद 28 जुलाई को जब वह अंबाला स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट लेने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि विनोद मित्तल की रिपोर्ट में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है।
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बेटे का आरोप स्वास्थ्य विभाग ने किया गुमराह
मृतक के बेटे अभिनव मित्तल ने आरोप लगाया कि उन्हें अंबाला स्वास्थ्य विभाग की ओर से गुमराह किया गया है। विभाग एक पेशेंट की दो रिपोर्ट कैसे बना सकता है। उन्होंने कहा कि वह इसकी शिकायत हरियाणा स्वास्थ्य महानिदेशक से करेंगे।
वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिली थी
बेटे का आरोप है कि पंचकूला निजी अस्पताल में उनके पिता को वेंटिलेटर की सुविधा नहीं दी गई थी। इस कारण उन्हें सेक्टर-21 पंचकूला के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर तीन दिन में 1.50 लाख का बिल बना दिया। आर्थिक तंगी के चलते उन्होंने पंचकूला स्वास्थ्य विभाग से गुहार लगाई थी कि उन्हें वेटिलेटर की सुविधा मुहैया कराई जाए।
सीएम से भी लगाई थी सुविधा की गुहार
वेंटिलेटर की सुविधा को लेकर उन्होंने सीएम के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग उन्हें भर्ती करने के लिए तैयार हो गया था। लेकिन सोमवार देररात पिता ने दम तोड़ दिया। इसके बाद उनका मंगलवार को सेक्टर-25 स्थित श्मशाम घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अंबाला और पंचकूला के अस्पताल के डॉक्टरों की ओर से इलाज में शुरू से लापरवाही बरती गई। अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं दी गई। उन्हें पीजीआई रेफर करने के लिए कहा गया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से किसी तरह का सहयोग नहीं मिला। अभिनव मित्तल ने स्वास्थ्य विभाग से गुहार भविष्य में ऐसा किसी के साथ न हो इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए जाएं।
कालका निवासी विनोद मित्तल को पैरालिसिस था। कोरोना होने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। अस्पताल प्रबंधन के रिकार्ड में उनकी मौत कोरोना से हुई है। यदि अंबाला स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट निगेटिव दी है तो इसकी जांच कराई जाएगी। क्योंकि पहले पॉजिटिव बताया गया था।
डॉक्टर जसजीत कौर, सीएमओ सामान्य अस्पताल सेक्टर-6 पंचकूला।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि इस तरह की लापरवाही सामने आएगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच रिपोर्ट में जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
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डॉ. एसबी कंबोज, महानिदेशक हरियाणा स्वास्थ्य विभाग।
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