हिमाचल के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की पत्नी के भतीजे अकांक्ष मर्डर मामले में बुधवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान बचाव पक्ष के एडवोकेट एनपीएस वड़ैच ने कई सवाल उठाए। अदालत को बताया कि पुलिस के गवाहों के बयानों में अंतर पाया जा रहा है।
केस के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर बरिंदर सिंह का कहना है कि फोटोग्राफर को उन्होंने फोन किया था, वहीं फोटोग्राफर का कहना है कि उसे पूनम दिलावरी का फोन आया था। एडवोकेट वड़ैच ने केस रिकवरी की सील पर लिखे शब्दों मिस्ट्री सील (एमएस) पर भी सवाल उठाया।
कहा कि मामले में बरिंदर सिंह, पूनम दिलावरी और मोहन लाल तीन आईओ शामिल हैं, जबकि इनमें से किसी का नाम एमएस में नहीं है। बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि आईओ केस प्रॉपर्टी पर अपने नाम के शब्दों की सील लगाते हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।
यह है पूरा मामला
अकांक्ष की 9 फरवरी 2017 को सेक्टर-9 में बीएमडब्ल्यू से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस को शिकायत दी गई थी कि अकांक्ष सेन पर जानबूझ कर गाड़ी चढ़ाई गई थी। अकांक्ष सेक्टर-9 में ही रहते थे और उसी सेक्टर में उसका एक दोस्त शेरा भी रहता था। रात को वह शेरा के पास ही रुका था।
इस मामले में हरमेहताब सिंह रारेवाला को मुख्य आरोपी बनाया गया था। हरमेहताब को 16 फरवरी 2017 को गिरफ्तार कर लिया गया था। शिकायत के अनुसार बलराज रंधावा गाड़ी चला रहा था और हरमेहताब रारेवाला उससे कह रहा था इसे टक्कर मारो और खत्म कर दो। रंधावा को अब तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। बाद में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था।