चंडीगढ़ के फैक्टरी कर्मचारियों और कंस्ट्रक्शन मजदूरों को सैलरी नहीं मिलने व अन्य प्रमुख समस्याओं का मुद्दा अमर उजाला लगातार प्रमुखता से उठा रहा है। ऐसे में प्रशासन भी हरकत में आ गया है। सोमवार को प्रशासन ने तीन अहम फैसले लिए हैं। इन फैसलों से फैक्टरी कर्मचारी और मजदूरों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।
पहले फैसले के तौर पर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने एलान किया कि शहर के सभी रजिस्टर्ड कंस्ट्रक्शन मजदूरों को 3000 रुपये कंस्ट्रक्शन लेबर वेलफेयर बोर्ड से स्पेशल सहायता राशि के तौर पर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन मजदूरों को आ रही समस्याओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है और यह राशि सभी मजदूरों के बैंक खातों में जल्द ही डाल दी जाएगी। बता दें कि रजिस्टर्ड कंस्ट्रक्शन मजदूरों को प्रशासन ने 3000 रुपये की सहायता राशि पहले भी जारी कर चुका है, यह दूसरी बार है जब 6670 मजदूरों के खाते में 3000 रुपये डाले जाएंगे।
वहीं, सोमवार को अमर उजाला में प्रकाशित खबर ‘प्रशासन के कर्मचारियों की गलती भुगत रहे कंस्ट्रक्शन वर्कर’ पर तत्काल संज्ञान लेते हुए श्रम विभाग ने चंडीगढ़ कंस्ट्रक्शन एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर यूनियन से संपर्क किया। इसके बाद यूनियन की अध्यक्ष ईशा अरोड़ा ने 45 ऐसे निर्माण मजदूरों की तत्काल लिस्ट बनाकर विभाग को सौंपी, जिनको 3000 रुपये की सहायता राशि का लाभ नहीं मिला है। हालांकि उन्होंने बताया कि ऐसे मजदूरों की कुल संख्या 100 से ज्यादा है। मंगलवार को बाकी मजदूरों की लिस्ट सौंप दी जाएगी।
जानकारी के अनुसार, बैंकों के विलय से आईएफएससी कोड के बदल जाने की वजह से यह समस्या पैदा हुई, जिस पर लेबर विभाग की तरफ से ध्यान नहीं दिया गया, जिसकी वजह से कई कंस्ट्रक्शन मजदूर के खातों में 3000 रुपये नहीं आए लेकिन अब विभाग ने ऐसे लोगों की सूची मांग कर गलती को सुधारने की बात कही है।
फैक्टरी कर्मचारियों को ईएसआई फंड से सैलरी देने के लिए केंद्र को भेजा प्रपोजल
शहर के विभिन्न फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिलने या फिर आधी सैलरी देने का मुद्दा अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने ईएसआई फंड से फैक्टरियों में काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन देने की अनुमति केंद्र सरकार से मांगी है। प्रशासन को यह सुझाव सांसद किरण खेर ने दिया था, जिसके बाद एडवाइजर मनोज परिदा ने तत्काल एक्शन लेते हुए सोमवार को यह प्रपोजल केंद्र सरकार को भेजा है।
बता दें कि इस समय लगभग सभी फैक्टरियां लॉकडाउन के चलते बंद हैं, जिसकी वजह से कई मालिकों ने कर्मचारियों को पूरी सैलरी नहीं दी है। अप्रैल महीने की सैलरी के लिए फैक्टरी मालिक अभी से अपनी असमर्थता जाहिर कर चुके हैं।