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खेलने पर मिलेंगे परीक्षा में अतिरिक्त अंक, पंजाब में लागू होगी खेल नीति

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चंडीगढ़। पंजाब में अब विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खेलों में हिस्सा लेने पर बोर्ड की वार्षिक परीक्षा में अतिरिक्त अंक मिलेंगे। राज्य सरकार विद्यार्थियों को व्यावसायिक खेलों से जोड़ने के लिए पहली बार राज्य में खेल नीति लागू करने जा रही है। खेलों में हिस्सा लेने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में न्यूनतम 15 अंक मिलेंगे। विद्यालयों में इस नीति के तहत खेल कोष भी बनाया जाएगा।
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पंजाब राज्य में 13309 प्राइमरी, 1687 हाई स्कूल और 1913 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इन स्कूलों में लगभग 26 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य और उन्हें पेशेवर खेलों से जोड़ने के लिए पंजाब सरकार स्कूलों में खेल नीति लागू करने जा रही है। यह पहली बार होगा कि खेल नीति के तहत चरणबद्ध रूप से वार्षिक परीक्षा के परिणामों में विद्यार्थियों को अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। खेलों में हिस्सा लेने वाले विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों में न्यूनतम 15 अंक दिए जाएंगे। इन अतिरिक्त अंकों के लिए विद्यार्थियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खेलों में हिस्सा लेना अनिवार्य होगा। नीति के तहत स्कूलों में खेल गतिविधि को शुरू करने के लिए संसाधन भी जुटाए जाएंगे। हाल ही में स्कूलों में इस कार्य के लिए शिक्षा विभाग की ओर से बजट भी जारी किया गया है। इस नीति के तहत स्कूलों में खेल कोष भी स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए शिक्षा विभाग ने स्कूलों के लिए शुल्क निर्धारित कर दिया है।
किस खिलाड़ी को मिलेंगे कितने अंक
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले खेलों में शामिल विद्यार्थी को पहला स्थान मिलने पर 25, दूसरे पर 22 और तीसरा स्थान हासिल करने पर 19 अंक जोड़े जाएंगे। खुशी की बात यह है कि खेलों में प्रतिभाग करने पर न्यूनतम 15 अंक मिलेंगे। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पहला स्थान पाने वाले खिलाड़ी को 15 अंक, दूसरे स्थान पर 12 और तीसरा स्थान हासिल करने वाले खिलाड़ी को 9 अंक दिए जाएंगे।
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खेल कोष के लिए शुल्क निर्धारित
सरकारी और एडेड स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए खेल नीति के तहत बनाए जाने वाले खेल कोष के लिए न्यूनतम राशि तय की गई है। सरकारी और एडेड स्कूलों में 9वीं, 10वीं के विद्यार्थियों से 15 रुपये प्रति महीना और 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को 20 रुपये प्रति महीना शुल्क देना होगा। निजी स्कूलों के लिए न्यूनतम 25000 रुपये और अधिकतम 1 लाख रुपये सालाना शुल्क निर्धारित किया गया है।
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