कालका। नगर परिषद कालका में पीआईडी को लेकर बड़ा घोटाला चल रहा है। इसके लिए एक हजार की सरकारी फीस राशि लेकर भी तत्काल पीआईडी नहीं जारी की जाती। पीआईडी अधिकारी जानबूझकर इसमें देरी करते हैं, ताकि लोग परेशान होकर उन्हें मनमर्जी की फीस अदा कर अपना काम करवाए।
यह आरोप एडवोकेट रोकेश करोतिया व अन्य वकीलों ने लगाए हैं। उन्होंने इस बाबत मुख्यमंत्री व स्थानीय निकाय मंत्री हरियाणा को एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्षता से जांच करने की मांग की। कहा कि नगर परिषद के अधिकारी हरियाणा सरकार के नियमों को नहीं मानते वह अपनी मनमानी करते हैं।
तहसील कालका में कार्यरत एडवोकेट राकेश करोतिया, एडवोकेट सतबीर राणा, एडवोकेट राज कुमार गौरी, एडवोकेट गोपाल चंदेल, एडवोकेट विनोद गौरी, एडवोकेट विशाल गोयल, एडवोकेट शिव कुमार चरण, एडवोकेट बलबीर ठाकुर, एडवोकेट भूपिंदर गौतम, एडवोकेट वीरेंद्र धीमान ने बताया कि नगर परिषद के अधिकारियों की कार्यशैली पीआईडी को लेकर संदेह जनक है। तहसीलदार कालका ने भी नगर परिषद को दो बार नगर परिषद कालका के अंतर्गत आने वाली सभी अधिकृत कालोनियों की खसरा नंबर सहित पूरी सूची उपलब्ध करवाने के बारे में पत्र लिखा है। लेकिन नगर परिषद के अधिकारी ने अभी तक इसका कोई जवाब नहीं दिया है।
करोतिया ने बताया कि नप अधिकारियों की ओर से जो अधिकृत कॉलोनी की सूची तहसील में उपलब्ध करवाई गई है वह हाथ से टाइप की गई लिस्ट है। इस पर किसी अधिकारी के कोई हस्ताक्षर नहीं है। संबंधित नगर परिषद के अधिकारी किसी की भी नहीं सुनते और अपनी चलाते हैं। सरकार को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।