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Panchkula News: फर्जी सर्टिफिकेट मामले में आरोपी को तीन साल बाद जमानत

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पंचकूला। चिकित्सा के क्षेत्र में फर्जी अनुभव सर्टिफिकेट बनवाने के मामले में अदालत ने आरोपी कृष्ण कुमार को तीन साल बाद जमानत दे दी है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरू कंबोज की अदालत ने यह निर्णय बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद सुनाया।

आरोपी को आयुर्वेदिक-यूनानी प्रैक्टिशनर्स एक्ट के तहत फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रैक्टिस करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मामला अक्टूबर 2022 में भारतीय चिकित्सा परिषद, हरियाणा के तत्कालीन रजिस्ट्रार दिनेश शर्मा की शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत में कहा गया था कि पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. बीएस संधू और डॉ. सीबी चौधरी ने मिलीभगत कर कृष्ण कुमार और वीरेंद्र कुमार से लाखों रुपये लेकर फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किए।
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जांच में इन प्रमाणपत्रों को फर्जी पाया गया और पता चला कि आरोपी इन्हीं के आधार पर क्लीनिक में अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहे थे। पुलिस ने इस सिलसिले में 5 जुलाई 2025 को कृष्ण कुमार और वीरेंद्र कुमार, जबकि 9 जुलाई को डॉ. सीबी चौधरी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में इन सभी के बयान में डॉ. बीएस संधू का नाम सामने आया, जिनकी गिरफ्तारी अभी लंबित है।
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वकीलों की दलीलें
सरकारी वकील ने तर्क दिया कि आरोपी की रिहाई से वह जांच को प्रभावित कर सकता है और गवाहों को धमका सकता है। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह बीते तीन वर्षों से मुकदमे का सामना कर रहा है। साथ ही सह-आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि अधिकांश गवाह सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्हें प्रभावित करना आसान नहीं है। साथ ही जांच लंबा समय ले सकती है। ऐसे में आरोपी को जेल में बनाए रखना उचित नहीं है। अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और एक जमानती श्योरिटी पर आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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