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वार्ड चार के निगम चुनाव को अदालत में चुनौती

Sun, 16 Jun 2013 05:30 AM IST
Panchkula
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पंचकूला। नगर निगम के वार्ड नंबर चार के चुनाव को एक उम्मीदवार ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में चुनौती दी है। आजाद उम्मीदवार सुच्चा सिंह का कहना है कि उनके साथ छल किया गया है। चुनाव चिह्न अलॉट होने के बाद आयोग की तरफ से उन्हें बताया गया कि ईवीएम मशीन में आठवे नंबर पर उनका नाम रहेगा। प्रचार के दौरान उन्होंने सभी को आठ नंबर पर बटन दबाने को कहा। इस बारे में पंफलेट, पोस्टर व बैनर भी छपवाए गए। आठ नंबर को बड़े ही आकर्षित ढंग से दिखाया गया, लेकिन जब वोटिंग की बारी आई तो उनका नाम नौंवे नंबर पर पहुंच गया। इसका फायदा आठवें नंबर वाले प्रत्याशी को मिला और वह चुनाव भी जीत गया। अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार कर चुनाव आयोग, निर्वाचन अधिकारी, नगर निगम के अधिकारियों और अन्य उम्मीदवारों को नोटिस भेज दिया है। मामले की अगली सुनवाई दो जुलाई को होगी।
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वार्ड नंबर चार के आजाद उम्मीदवार सुच्चा सिंह ने अदालत को बताया कि रिटर्निंग अधिकारी की ओर से चुनाव चिह्न अलॉट होने के बाद ईवीएम पर सभी के नाम चस्पा दिए गए। सुच्चा सिंह को बताया गया कि ईवीएम मशीन पर उसका आठवां नंबर होगा। आठवे नंबर के आगे उसका नाम और चुनाव चिह्न चस्पा होगा। नंबर अलाट होने के बाद सुच्चा सिंह ने प्रचार के दौरान इस नंबर को खूब प्रचारित किया।
लोगों को बताया कि आठवें नंबर की ही बटन दबाएं। जिस दिन वोट पड़ी तो उसका नाम नौंवे नंबर पर था, जबकि आठवें नंबर पर सतिंदर सिंह टोनी का नाम था। सुच्चा सिंह ने अदालत को बताया कि उसके कहने पर वोटरों ने बटन दबाई और इसका फायदा टोनी को मिला।
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टोनी को सबसे ज्यादा मिले थे वोट
वार्ड नंबर चार में कुल दस प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन जीत टोनी की हुई। खास बात यह है कि टोनी की जीत का अंतर रिकार्ड था। उन्हें कुल 3805 वोट मिले जबकि दूसरे नंबर पर आए प्रत्याशी भीम सिंह को 1571 वोट मिले। सुच्चा सिंह को 1072 वोट मिले थे। सतंदिर सिंह टोनी इनेलो के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
टोनी ने सरकारी जमीन पर बनाया मकान : सुच्चा सिंह
सुच्चा सिंह ने अदालत को दी अपनी अर्जी में बताया कि टोनी ने नामांकन के दौरान जो घर बताया है, वह सरकारी जमीन पर बना हुआ है। इस जमीन का मालिक नगर निगम है। उनका आरोप है कि टोनी ने चुनाव आयोग को गलत हलफनामा पेश किया है। उन्होंने अर्जी के जरिए इस वार्ड के चुनाव को रद करने की मांग की है।
कोट
नियम के मुताबिक यदि किसी ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता। इस मामले की सुनवाई दो जुलाई को होनी है। अदालत ने चुनाव आयोग, नगर निगम अधिकारियों और अन्य उम्मीदवारों को नोटिस भेजा है।
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डा. मेवा सिंह, एडवोकेट
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