पंचकूला। ज्योति हत्याकांड में पुलिस को क्राइम स्पाट से न तो कोई फिंगर प्रिंट मिले और न ही किसी वाहन के टायर के निशान। यह खुलासा पुलिस ने अदालत में दिए चालान में किया है। पुलिस का कहना है कि हत्या के बाद फिंगर प्रिंट स्पेशलिस्ट की एक टीम पहुंची। मौके से मिली हर चीज की बारीकी से जांच की, लेकिन किसी भी व्यक्ति का सुराग नहीं मिल सका। चालान के मुताबिक ज्योति की लाश से एक वोदका की बोतल, पार्कर पैन, एक हैंड बैग, उसके जूते और अन्य सामान मिले थे। टीम ने जांच में जांच में पाया कि इन सभी सामानों में किसी भी प्रकार के धूल के कण नहीं थे। ऐसा लग रहा था कि इन सामानों को किसी अच्छे कपड़े से साफ किया गया है। इसके अलावा ज्योति का एक जूता 12 फुट दूर, जबकि दूसरा 25 फुट दूर झाड़ियों में मिला। ज्योति के चेहरे पर गहरी चोटें थीं। इसके अलावा चिन पर भी चोट के निशान थे।
टायर के भी निशान नहीं मिले
सीन आफ क्राइम और फिंगर प्रिंट की टीम को मौके पर से कोई भी टायर के निशान नहीं मिले हैं। यहां तक कि ब्रेक लगाने के भी निशान नहीं पाए गए, जबकि पुलिस की थ्योरी के मुताबिक ज्योति का गला दबाने के बाद उस पर ट्रक चढ़ाकर उसका चेहरा बिगाड़ने की कोशिश की गई, ताकि कोई भी उसे पहचान न पाए। इसके अलावा वहां पर विधायक राम कुमार चौधरी की एक भी गाड़ी मौजूद थी। उसके भी निशान नहीं मिले हैं। जांच टीम ने कई मीटर दूर तक सड़क की जांच की, लेकिन कुछ भी नहीं मिला
ज्योति भी छिपाती थी अपनी पहचान
राम कुमार चौधरी की तरह ज्योति भी अपनी पहचान छिपाती थी। ज्योति का पूरा नाम ज्योति रानी है, लेकिन अस्पताल में अपना नाम ज्योति गिल लिखती आई थी। जब सेक्टर 16 स्थित अस्पताल में गई तब भी उसने अपना नाम ज्योति गिल लिखवाया। उसके बाद जब वह जिंदल अस्पताल पहुंची तब भी उसने अपना ज्योति गिल लिखवाया। इससे जाहिर है कि चौधरी के साथ ज्योति भी अपनी पहचान छिपाती रही। चौधरी ने भी जिंदल अस्पताल में पहले अपना नाम राम कुमार लिखा था, लेकिन बाद में रमेश कुमार लिख दिया था।