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ज्योति हत्याकांड ः पुलिस की जांच में 35 खामियां!

Fri, 22 Mar 2013 05:32 AM IST
Panchkula
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पंचकूला। ज्योति हत्याकांड में पुलिस चालान लगभग तैयार चुकी है और अगले हफ्ते तक इसे अदालत में पेश किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने जो चालान तैयार किया है, उसमें मुख्य आरोपी हिमाचल के विधायक राम कुमार चौधरी के खिलाफ कोई भी डायरेक्ट एविडेंस नहीं है। हाईप्रोफाइल केस होने के बावजूद वैज्ञानिक साक्ष्य भी नहीं है और केस में अहम कड़ी साबित होने वाले डाक्टर के कोई हस्ताक्षरनुमा बयान तक दर्ज नहीं हैं।
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सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की थ्योरी में काफी अंतर हैं। इसीलिए पुलिस द्वारा अब तक की गई जांच में सरकारी वकील (पब्लिक प्रासिक्यूटर) की ओर से भी 35 से ज्यादा खामियां गिनवाई गई हैं। हालांकि सरकारी वकील द्वारा खामियां गिनाने के बाद संभव है कि कुछ खामियां दूर कर ली जाए, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य जुटा पाना मुश्किल होगा। ज्योति हत्याकांड के सभी आरोपी अंबाला जेल में हैं। पुलिस को आठ अप्रैल से पहले अदालत में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश करना है। चालान के आधार पर सूत्र बताते हैं कि इस पूरे केस की जांच इतनी हल्की व लापरवाह तरीके से की गई है कि कानून का कोई भी जानकर बता सकता है कि आरोपियों को फायदा पहुंचाने के मकसद को आगे रखते हुए कुछ तथ्य ही नहीं जुटाए गए हैं। चाहे वह साइंटिफिक साक्ष्यों की बात हो या फिर अन्य सुबूतों की। पुलिस के पास ज्योति व विधायक के मोबाइल लोकेशन, ज्योति की बहन की शादी की फोटो, कॉल डिटेल्स व अन्य कुछ गवाह हैं, लेकिन आरोपों को साबित करने के लिए ये सब काफी नहीं हैं। पुलिस के मुताबिक, विधायक चौधरी ने हिरासत में अपना जुर्म कबूल लिया है। लेकिन, कानून के जानकार बताते हैं कि कस्टडी में दिया गया बयान इतना महत्वपूर्ण नहीं होता। पुलिस को चौधरी के कई साइंटिफिक टेस्ट करवाने चाहिए थे, लेकिन पुलिस ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।
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इन मुद्दों पर ध्यान नहीं
1. आरोपी विधायक का पालीग्राफ टेस्ट नहीं कराया गया।
2. चौधरी व अन्य लोगों का नारको परीक्षण भी नहीं कराया गया।
3. हत्या वाले स्पॉट से मिले खून की डीएनए सैंपलिंग नहीं करवाई गई।
4. काल डिटेल्स के रिकार्ड लेने के लिए मोबाइल कंपनी को अब तक पत्र नहीं लिखा गया, जबकि एक साल बाद मोबाइल कंपनियां रिकार्ड नष्ट कर देती हैं।

यहां भी उठी उंगली
1. गवाहों को आरोपी की लिस्ट में शामिल कर दिया।
2. फर्जी कागजात पर सिम देने वाले कंपनी के कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया।
3. गर्भपात कराने वाले डाक्टर के रिकार्डेड बयान दर्ज नहीं किए गए।
4. ज्योति के सिम रिकवर की थ्योरी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
5. पुलिस के मुताबिक, पहले पीटा फिर ज्योति की हत्या की गई, जबकि पोस्टमार्टम के मुताबिक पीटने के तुरंत बाद उसकी मौत हो गई थी।

कोट
जांच में जो खामियां रह गई हैं, उन्हें दूर करने की कोशिश की जा रही है। इस केस को मजबूत बनाकर चालान अदालत में पेश किया जाएगा।
अश्विन शेरणवी, डीसीपी पंचकूला
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