मोरनी। प्रदेश के इकलौते पर्वतीय पर्यटन स्थल में पेयजल को लेकर जनस्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। पेयजल का मुख्य स्त्रोत घग्गर नदी का जलस्तर सर्दी में ही बहुत ज्यादा गिर गया है। इससे गर्मी में पेयजल संकट का अंदाजा लगाया जाना शुरू हो गया है। जन स्वास्थ्य विभाग कोई विकल्प तलाशना तो दूर यहां बडे़ पैमाने पर हो रही पेयजल लाइनों की लीकेज को भी नहीं दुरुस्त करवा पा रहा। इससे सैकड़ो गैलन पेयजल बर्बाद हो रहा है। मोरनी की बीस पंचायतों के लगभग चार सौ से ज्यादा गांवों को पेयजल मुहैया करवाने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग के पास मुख्य जल स्त्रोत घगगर नदी है। यहां पर सरकार और नाबार्ड ने करोड़ों रुपये की लागत से कुछ ट्यूबवेल लगाए मगर उनसे मिलने वाला अधिकतर पानी जन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते लीकेज में बर्बाद हो जाता है।
मोरनी-पंचकूला मुख्य सड़क पर ही मोरनी से भूडी तक पांच से छह किलोमीटर की दूरी में पच्चीस से ज्यादा जगहों पर पानी की लीकेज हो रही है। हैरानीजनक है कि जिस लाइन से लीकेज हो रहा है, उसे लगाए चार माह भी नहीं हुए हैं। मुख्य जल स्त्रोत घग्गर में इस बार पानी की अभी से बेहद कमी दिख रही है। जन स्वास्थ्य विभाग प्रभारी विनोद कुमार ने कहा कि समस्या गंभीर है। इसका विकल्प तलाशने का प्रयास किया जाएगा। लीकेज ठीक करने के लिए कडे़ कदम उठाएंगे।