पंचकूला। गांव चंडीकोटला में करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी दरारें आ गई हैं। इन दरारों से करीब 45 मकान बुरी तरह से प्रभावित हो गए हैं। चार दिन पहले ही एक मकान ध्वस्त हो चुका है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने इन घरों को खाली करने के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को आंगनबाड़ी, गुरुद्वारा नाडा साहिब और माता मनसा मंदिर में शिफ्ट होने की गुजारिश की है। कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं तो कुछ पड़ोसियों के खाली घरों में शिफ्ट हो गए हैं। दरार पड़ने के कारणों को जानने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी से जियोलाजिस्ट की एक टीम रविवार को चंडीकोटला पहुंचेगी। साथ ही रुड़की आईआईटी के वैज्ञानिकों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। प्राथमिक जांच में बात सामने आई है कि यह एरिया लैंड स्लाइडिंग एरिया है। इस कारण दरारें पड़ी हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इन दरारों के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं।
चंडीमंदिर टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर दूर बसे चंडीकोटला में दरारें आना करीब एक महीने से शुरू हो गई थीं। उसके बाद वह थम गईं, लेकिन 11 सितंबर को भारी बारिश के कारण दरारें फिर से बढ़ने लगीं। अब करीब 45 घर इसके दायरे में आ गए। बुधवार को तो एक मकान भी पूरी तरह से ध्वस्त हो गया।
दहशत से भरी चार रातें
सोमवार और मंगलवार को भारी बरसात के बाद चंडीकोटला की रातें दहशत से भर गईं। बीती चार रातों से लोग ठीक से सो नहीं पाए। हर वक्त चौकन्ने रहते हैं कि कहीं कोई आपदा न आ जाए। दहशत का आलम यह है कि लोग एक हफ्ते से रोजी-रोटी कमाने के लिए घर से निकले नहीं। बच्चों को तो सुला लेते हैं, लेकिन खुद आसपास के मकानों में निगरानी रख रहे हैं।
अब तक सिर्फ 15 लोग शिफ्ट हुए
दरार आने के बाद अब तक सिर्फ 15 परिवारों के लोग अपने रिश्तेदारों या फिर किराए के मकानों में शिफ्ट हो पाए हैं। यह लोग पिछले कई सालों से यहां मकान बनाकर रह रहे हैं। प्रशासन ने इनसे शिफ्ट होने के लिए तो कह दिया लेकिन वे जाएं कहां? गुरुद्वारे और माता मनसा देवी में सारा सामान लेकर जा सकते नहीं। इसलिए अधिकतर लोग आसपास उन मकानों में शिफ्ट होने की कोशिश में हैं, जहां दरारें न आई हों।
मकानों से निकल रहा है पानी
चंडीकोटला हाइवे से करीब 150 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। ऊपरी हिस्से में खेती भी होती है। यह दरार खेत से होती हुई नीचे मकानों तक पहुंची है। बरसात का पानी खेतों से होकर मकानों के अंदर से निकल रहा है। इससे कई लोगों का सामान भी खराब हो गया है। पानी रुकने का नाम नहीं ले रहा। इससे जाहिर है कि दरारें एक सीध में ही आई हैं और इतनी गहरी हो चुकी हैं कि उनसे पानी भी रिसने लगा है।
साल 1995 में भी आई थीं दरारें
ग्रामीणों ने बताया कि साल 1995 में भी दरारें आने के बाद चार मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गए थे। उसके बाद से कुछ भी ऐसा नहीं हुआ था। हालांकि हादसे में किसी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। उस दौरान भी यही बताया गया कि लैंड स्लाइडिंग की वजह से ऐसा हुआ है।
क्या कहते हैं लोग
जब प्रशासन ने डेंजर जोन घोषित कर दिया है तो प्रशासन को चाहिए लोगों की मदद करे। प्रशासन सिर्फ शिफ्टिंग के लिए कह रहा है, लेकिन सारा सामान लेकर कैसे शिफ्ट हो सकते हैं। प्रशासन की ओर से हमें मदद नहीं मिल रही है।
-बलविंदर, निवासी चंडीकोटला
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लोग काफी डरे हुए हैं। प्रभावित मकानों के लोग पिछले एक हफ्ते से घर पर ही बैठे हैं। प्रशासन मदद के नाम सिर्फ मकान खाली करने का आश्वासन दे रहा है। यदि यह खतरे की जगह है तो प्रभावित लोगों को दूसरी जगह जमीन देकर उनका पुनर्वास किया जाए।
-रोशन, निवासी चंडीकोटला
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11 सितंबर की रात 12 बजे धमाके की आवाज आई। पूरा परिवार घर से बाहर निकल आया। कुछ ही देर बाद मेरा पूरा मकान गिर गया। मकान गिरने से काफी नुकसान हो गया है।
-रामपाल, पूर्व सरपंच, चंडीकोटला
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क्या कहते हैं जल वैज्ञानिक
जल वैज्ञानिक एमएस लांबा ने बताया कि प्राथमिक जांच में लैंड स्लाइडिंग का मसला लग रहा है। चंडीकोटला भी पहाड़ी क्षेत्रों में आता है। भारी बरसात के कारण ऐसा हो सकता है, लेकिन यह नहीं समझना चाहिए कि दरारें आने के पीछे लैंड स्लाइडिंग का कारण है। इसके और भी कई कारण हो सकते हैं। मसलन भूमि और जल का दोहन या फिर भूकंप।
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क्या कहती हैं एसडीएम
एसडीएम शरणदीप कौर बराड़ ने बताया कि दरारों से 45 मकान प्रभावित हैं। लोगों को सुरक्षित जगह चले जाने को कहा गया है। प्रशासन की ओर से उन्हें आंगनबाड़ी, स्कूल, नाडा साहिब और माता मनसा देवी मंदिर में शिफ्ट होने को कहा गया है। प्रशासन की ओर से लोगों की पूरी मदद की जा रही है। रविवार को पंजाब यूनिवर्सिटी की एक टीम जांच के लिए पहुंच रही है। रुड़की आईआईटी से संपर्क किया जा रहा है। उन्हें मेल कर दिया गया है।