सर्जरी के बाद फिजियोथैरेपी नहीं हुई तो आपरेशन फेल
पीजीआई में फिजियोकॉन चंडीगढ़ का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीजीआई में इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथैरेपिस्ट की ओर से आयोजित फिजियोकॉन चंडीगढ़ में देशभर से फिजियोथैरेपिस्ट पहुंचे। इस दौरान फिजियोथैरेपी के नए ट्रेंड, रिसर्च और अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन डीन राजेश कुमार और अरविंद राजवंशी ने किया। इस मौके पर जालंधर के लायलपुर खालसा कालेज के फिजियोथैरेपी डिपार्टमेंट के एचओडी राजू शर्मा ने कहा कि अधिकतर मर्ज के इलाज में फिजियोथैरेपी की भूमिका काफी अहम होती है। मुख्य काम दिव्यांगता को कम करना है। राजू सेरेब्रल पाल्सी मर्ज के एक्सपर्ट माने जाते हैं। वे अब तक ऐसे हजार से ज्यादा बच्चों को देख चुके हैं और उनमें से 200 से ज्यादा बच्चे अपना काम खुद करते हैं। वे किसी पर निर्भर नहीं हैं। उनके पास हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल और यूपी से मरीज आते हैं। उनका कहना है कि पहले फिजियोथैरेपिस्ट ऐसे बच्चों को नहीं देखते थे। कुछ केसों पर काम किया तो उसके बेहतर रिजल्ट आए। उसके बाद उन्होंने सेरेब्रल पाल्सी के ही मरीज देखने शुरू कर दिए। उनका मानना है कि थैरेपी में बच्चों को इनवाल्व करने से बच्चे जल्दी ठीक होते हैं।
सर्जरी के बाद फिजियोथैरेपी अहम
पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के फिजियोथैरेपी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर डॉ. एजीके सिन्हा ने बताया कि ऑपरेशन के बाद यदि फिजियोथैरेपी की मदद नहीं ली तो आपरेशन फेल हो सकता है। ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, हाथों की सर्जरी, ट्रोमा और न्यूरोलाजी सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी के लिए फिजियोथैरेपी अहम है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मरीज बढ़ रहे हैं, उसके अनुपात में फिजियोथैरेपिस्ट की संख्या भी बढ़ानी होगी।
खिलाड़ियों को हुनर के साथ फिटनेस जरूरी
फिटनेस कंसलटेंट डॉ. एहजाज एसाही ने बताया कि खिलाड़ियों को हुनर के साथ फिटनेस को ध्यान रखना होगा। इससे उनका कैरियर आगे तक जाता है। यदि कोई फिटनेस पर ध्यान देता है और उसके पास हुनर नहीं है तो उसका कैरियर दांव पर है। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए चार बातों पर ध्यान देने की सलाह दी। पहली फिटनेस, दूसरी मेंटल स्ट्रैंथ, तीसरी इंजरी के बाद जल्दी रिकवरी, चौथी पेरेंट्स का आशीर्वाद।
ढाई हजार बच्चों को आत्मनिर्भर बना चुके हैं
बिहार के सीतामढ़ी में दिव्यांगन संस्थान के संचालक फिजियोथैरेपिस्ट राजेश कुमार ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चा यदि उनके पास जल्दी पहुंच जाए तो वे बच्चे को काफी हद तक खड़ा कर सकते हैं। अब तक वे ढाई हजार से ज्यादा बच्चों को आत्मनिर्भर बना चुके हैं। इस बीमारी में बच्चे की केयर न की जाए तो वह चलने-फिरने के काबिल नहीं हो पाता और वे हमेशा के लिए दूसरों पर डिपेंड हो जाते हैं।
आईसीयू में फिजियोथैरेपिस्ट 24 घंटे तैनाती से रिकवरी जल्दी
लखनऊ एसजीपीजीआईएमएस के क्रिटिकल केयर मेडिसिन के डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि आईसीयू में यदि 24 घंटे फिजियोथैरेपिस्ट की तैनाती की जाए तो मरीजों को ज्यादा फायदा मिल सकता है। अभी सिर्फ 18 प्रतिशत हास्पिटल में इस तरह के इंतजाम किए गए हैं। इस बारे में हास्पिटल प्रशासन और सरकारों को सोचना चाहिए। क्योंकि आईसीयू में समय-समय पर मरीज की स्थिति बदलती रहती है।
स्ट्रेस को दूर करने में भी भूमिका
गुजरात के आनंद स्थित विनायका इंस्टीट्यूट आफ फिजियोथैरेपी की प्रिंसिपल डॉ. सौमी सिन्हा ने बताया कि आजकल स्ट्रैस की वजह से कई बीमारियां फैल रही हैं। फिजियोथैरेपी के पास इसका भी इलाज है। उनके पास स्ट्रैस को दूर करने का मैनेजमेंट होता है। स्ट्रेस को दूर करने में एक्सरसाइज एक कारगर ट्रीटमेंट है। फिजियोथेरेपी के पास अब कई एडवांस और सॉलिड तकनीक हैं।