सोलर पैनल की तरह भविष्य में कारें ऑटोमेटिक हो जाएंगी साफ : प्रो. बर्नार्ड
- नीदरलैंड के रहने वाले रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. बर्नार्ड लुकास फेरिंगा बुधवार को पहुंचे थे पीयू
बोले- नैनोकार के जरिये मिली सफलता, आगे भी चल रहा है नया रिसर्च
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. बर्नार्ड लुकास फेरिंगा ने कहा कि जीवन आसान नहीं है। यह कई धाराओं में मोड़ता है। पहले मैंने एक कंपनी में साढ़े छह साल काम किया लेकिन मैं उसके लिए नहीं बना था। उसके बाद ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय नीदरलैंड की लैब को चुना और उसमें रिसर्च स्कॉलर बना। धीरे-धीरे काम आगे बढ़ता गया और दुनियाभर से प्यार मिला। नोबेल पुरस्कार का हकदार बना। उन्होंने कहा, भविष्य में नैनो फार्मूले से एक ऐसा सिस्टम तैयार हो रहा है जो शरीर समेत तमाम साधनों में अपने आप काम करेगा। इससे सोलर पैनल की तरह कारें ऑटोमेटिक साफ हो जाएंगी। प्रो. बर्नार्ड पीयू के लॉ ऑडिटोरियम में फार्मास्युटिकल विभाग के गोल्डन जुबली कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान प्रो. बर्नार्ड फरिंगा ने जॉय ऑफ डिस्कवरी पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने नैनो मोटर के जरिए तैयार की कार का अनुभव बनाया। उन्होंने बताया कि शरीर में जिस तरह बायोलॉजिकल मोटर को प्रयोग करके शरीर को काम करने लायक बनाया जाता है ठीक उसी तरह नैनो मोटर ने काम किया। दुनियाभर की सड़कों पर बढ़ते वाहनों के बोझ को देखा। इंसान का कद उन्हें कम मिला और गाड़ियों का अधिक। इसी को ध्यान में रखकर नैनामोटर पर कार्य किया जो दुनियाभर को पसंद आई। इसका इंजन बहुत हल्का था, अंदेशा यह भी था कि शायद इस पर पूरी तरह काम नहीं हो पाया लेकिन आणविक नैनोकार सफल हो गई। उन्होंने ड्रग डिलीवरी सिस्टम के बारे में भी बताया। कहा कि नैनो विधि से दी जाने वाली दवाएं सीधे ट्यूमर पर कार्य करेंगी न कि शरीर के अन्य हिस्सों पर। इस पर कार्य चल रहा है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक सिस्टम से ड्रग डिलीवरी अप्रोच को भी उन्होंने समझाया। कहा कि ऐसे भी आविष्कार चल रहे हैं जो लाइट जलेगी तो दवा ट्यूमर पर प्रभाव डालेगी और लाइट बंद होगी तो दवाओं का असर नहीं होगा।
प्रो. बर्नार्ड फरिंगा ने 1835 में बनी पहली इलेक्ट्रिक कार के बारे में आज की कार से तुलना की। इसके अलावा पवन चक्की के जरिये उत्पन्न होने वाली बिजली के बारे में भी बताया। आंख के रेटिना के बारे में भी बताया। इससे पूर्व वीसी प्रो. राजकुमार ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर प्रो. रजत संधीर, डॉ. प्रशांत गौतम आदि मौजूद रहे।
फेरिंगा के सफलता के मंत्र
बड़े सपने देखते हुए उनका पालन करें
नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. बर्नार्ड लुकास फेरिंगा ने कहा कि बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए अपनी प्रतिभा की खोज करें। असंभव कुछ नहीं है। बशर्ते कि लक्ष्य के मुताबिक काम हो। उन्होंने युवाओं से कहा कि अपने जुनून को काम में बदलें। विमान की खोज के लिए मानव मस्तिष्क द्वारा किए गए कार्य को सभी केसामने रखा। उन्होंने मदर नेचर की प्रशंसा की। बताया कि उनके पास 15 रिसर्च स्कॉलर की टीम है जो भविष्य की जरूरतों पर काम कर रही है। उन्होंने सफलता का मंत्र सुझाया। कहा, बड़े सपने देखते हुए उनका पालन करें, आश्वस्त रहें, अपनी ऊर्जा की खोज करें और सीमाएं खोजें।