चुनाव प्रचार के लिए प्लास्टिक सामग्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग
केंद्रीय और राज्य चुनाव आयोग को पत्र भेज पंजाब में तुरंत लागू करने को कहा
आयोग ने राजनीतिक पार्टियों को नहीं जारी किए आदेश तो हाईकोर्ट में दायर होगी याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। लोकसभा चुनाव में राजनीतिक पार्टियों द्वारा प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक सामग्री पर इस बार प्रतिबंध लग सकता है। केरल हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 फरवरी 2019 को आदेश जारी कर प्रचार के लिए प्लास्टिक सामग्री का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं राज्य भर में अगर कहीं प्रचार के लिए इस तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया गया है तो उसे तुरंत हटाने के लिए कहा है। केरल हाईकोर्ट के इन्हीं आदेशों को आधार बनाकर लुधियाना निवासी रोहित सभरवाल ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ऑफ इंडिया और चीफ इलेक्टोरल अफसर पंजाब को पत्र भेज पंजाब में भी इसे लागू करने की मांग की है। जिससे लोकसभा चुनाव से दौरान इस तरह की सामग्री का प्रयोग ना हो। अगर चुनाव आयोग इस पत्र का कोई संज्ञान नहीं लेता है, तो वह पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में इसी बात को आधार बनाकर याचिका दायर करेंगे। जिससे यहां पर भी केरल हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करवाया जा सके।
रोहित सभरवाल के अनुसार केरल निवासी केवी सोहन ने हाईकोर्ट में याचिका फाइल की थी। इसमें कहा गया था कि चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियां अपने प्रचार के लिए प्लास्टिक मैटेरियल का इस्तेमाल करते है। प्रचार का यह मैटेरियल पर्यावरण के लिए हानिकारक है। क्योंकि यह बॉयोडीग्रेबल नहीं है। इससे आम जनता को भी परेशानी उठानी पड़ती है। इसीलिए लोकसभा चुनाव के अलावा आने वाले चुनाव में ईको फ्रेंडली मैटेरियल का इस्तेमाल होना चाहिए। याचिका पर सुनवाई करते केरल हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया है कि प्रचार के दौरान पीवीसी फ्लैक्स बोर्ड के अलावा किसी भी तरह का प्लास्टिक मैटेरियल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। अदालत के इस आदेश की कॉपी के साथ उन्होंने चीफ इलेक्शन कमीशन और चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर पंजाब को लेटर भेज पंजाब में भी इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सभी राजनीतिक पार्टियों को तुरंत इस संबंध में आदेश जारी करने की मांग की है। जिससे पंजाब में भी चुनाव प्रचार के लिए ईको फ्रेंडली मैटेरियल का प्रयोग हो सके।
बाक्स
यह सामग्री होती है सबसे ज्यादा इस्तेमाल
यहां बता दे कि किसी भी चुनाव में राजनीतिक पार्टियां सबसे ज्यादा प्रचार के लिए पीवीसी फ्लैक्स का इस्तेमाल करती है। इसके अलावा अब राजनीतिक पार्टियों के झंडे से लेकर टोपियां भी प्लास्टिक से तैयार होती है। जिनका एक बार इस्तेमाल होने के बाद दोबारा प्रयोग नहीं किया जा सकता है। किसी भी जनसभा के बाद इन्हें कचरे के तौर पर फेंक दिया जाता है। जोकि पर्यावरण के लिए सबसे घातक साबित होते है।