पंचकूला गए सेब आढ़तियों को मनाने गए चेयरमैन
प्रशासन दो प्रतिशत मार्केट फीस खत्म कर दे, सेक्टर-26 मंडी में आकर करने लगेंगे कारोबार
सांसद ने 27 जुलाई को होने वाली समिति की बैठक में मामला उठाने का दिया आश्वासन
आढ़तियों का कहना है कि मार्केट फीस से भ्रष्टाचार बढ़ता है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
शहर की मंडी में फल और सब्जी पर दो फीसदी मार्केट फीस लगने के विरोध में 50 से अधिक सेब के आढ़ती पंचकूला मंडी में शिफ्ट हो गए। इन आढ़तियों को मनाने के लिए मार्केट कमेटी के चेयरमैन जुझार सिंह और निदेशक दवेंद्र सिंह बबला पंचकूला गए। इस दौरान आढ़तियों ने स्पष्ट कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन सेब पर चार्ज होने वाली दो प्रतिशत मार्केट फीस को समाप्त कर दे तो वह सेक्टर-26 मंडी में आकर फिर से कारोबार करने लगेंगे। उधर, आढ़तियों की सांसद किरण खेर से भी बात हो गई है। खेर ने आढ़तियों को आश्वासन दिया है कि 27 जुलाई को गृह मंत्री की सलाहकार समिति में वह फीस समाप्त करने का मुद्दा उठाएंगी।
सेब का सीजन शुरू हो गया है, लेकिन एक अगस्त से सेब की आवक बढ़ेगी। इस समय 10 से 15 हजार पेटी ही आ रही है। सेक्टर-26 मंडी में सिर्फ 500 पेटी ही बिकने को आई। हरियाणा क्षेत्र होने के कारण पंचकूला में मार्केट फीस नहीं है। इस समय सेक्टर-26 मंडी में जो भी फल और सब्जियां जमींदार लेकर आते हैं, उनसे दो प्रतिशत मार्केट फीस चार्ज की जाती है।
फीस से आठ करोड़ की होती है कमाई
सेक्टर-26 मंडी में पूरे साल में सब्जी और फल से मार्केट फीस के रूप में आठ करोड़ की कमाई होती है। इसमें सिर्फ सेब से तीन करोड़ की कमाई होती है। सेब के कुल 120 आढ़ती हैं जिनमें से 50 से ज्यादा पंचकूला मंडी में चले गए हैं।
प्रशासन माफ करे मार्केट फीस: बृज मोहन
सब्जी एवं फल आढ़ती एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बृज मोहन का कहना है कि पंजाब को छोड़कर सभी राज्यों में फल और सब्जियों से मार्केट फीस समाप्त हो गई है। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन को भी फीस समाप्त करनी चाहिए। इसके कारण भ्रष्टाचार भी बढ़ता है। कमेटी के चेयरमैन जुझार सिंह और पूर्व चेयरमैन दवेंद्र सिंह बबला उनके साथ मीटिंग करने के लिए पंचकूला मंडी गए थे। आढ़तियों ने स्पष्ट कर दिया है कि एक तो मार्केट फीस समाप्त की जाए और दूसरा जो सेक्टर-39 में जो नई मंडी बन रही है, उसका प्रपोजल भी आढ़तियों को बताया जाए।
पंचकूला गए आढ़तियों को वापस बुलाने का प्रयास किया जा रहा है। मार्केट फीस समाप्त करने का निर्णय अपने स्तर पर नहीं कर सकते। चंडीगढ़ में पंजाब एक्ट लागू होता है। पंजाब में फलों और सब्जियों पर फीस लगती है। मार्केट फीस खत्म करने का निर्णय प्रशासक ले सकते हैं। प्रशासक जो भी निर्णय लेंगे वह लागू कर देंगे।
- जुझार सिंह, मार्केट कमेटी के चेयरमैन।
150 से दो 200 करोड़ का हर साल होता है कारोबार
चंडीगढ़ की सेक्टर-26 मंडी में हर साल 150 से 200 करोड़ रुपये का सेब का कारोबार होता है। हिमाचल और कश्मीर से सेब आता है। यहां से दूसरे राज्यों में जाता है। आढ़तियों का कहना है कि करोड़ों रुपये फीस द्वारा इकट्ठा करने के बावजूद मंडी में सुविधा नहीं है।