एम्स रिजल्ट : ट्राइसिटी नवतेज मांगट टॉपर
देश भर में 40वें स्थान पर रहे, मोहाली के अंकुश जिंदल को 65 वीं रैंक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)-2017 के नतीजे में ट्राइसिटी के दो छात्र टॉप-100 में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे। चंडीगढ़ सेक्टर-36 निवासी नवतेज मांगट ने 40वीं रैंक हासिल की जबकि मोहाली के अंकुश जिंदल ने 65 वां स्थान हासिल किया। इसके अलावा चंडीगढ़ में पढ़ी शाहाबाद की महक सिंघल ने 14 वीं, इश्मीत कौर की 41 वीं और आरुषि जैन को 78 वीं रैंक मिली है। जबकि ओबीसी कोटे में अजीजुर रहमान को 10 वां स्थान मिला है। साहिल सिंगला 103 वें, दीपेश मित्तल 114 वें और अर्पित मंधान 135 वें स्थान पर रहे हैं।
गोल को फोकस कर करें तैयारी : नवतेज
पटियाला में कर्नल के पद पर तैनात एनएस मांगट के बेटे नवतेज मांगट का कहना है कि किसी भी परीक्षा में सफलता के लिए टारगेट को फोकस करना बहुत जरूरी है। सेंट जोंस हाईस्कूल सेक्टर-26 से पढ़ाई करने वाले नवतेज की मां तेजिंदर मांगट मोहाली के अजीत करम सिंह इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में टीचर हैं। नवतेज के अनुसार उनकी प्रेरणा उनके चाचा हैं जो कनाडा में ईएनटी विशेषज्ञ हैं। नवतेज ने कहा कि वह कोचिंग के अलावा रोज सात से आठ घंटे पढ़ता था। तैयारी के दौरान उन्होंने अपने गोल पर फोकस रखा।
डॉक्टर माता-पिता का बेटा भी बनेगा डॉक्टर
ब्रिटिश स्कूल सेक्टर-44 से पासआउट मोहाली निवासी अंकुश जिंदल के माता-पिता भी पेशे से डॉक्टर हैं। मोहाली के निजी अस्पताल में कार्यरत अनुपम जिंदल न्यूरो सर्जन हैं तो मां मनीषी जिंदल कैंसर स्पेशलिस्ट हैं। अंकुश भी न्यूरोसर्जन बनना चाहते हैं। अंकुश अपनी सफलता का श्रेय अपने टीचर्स को देते हैं। उनके अनुसार उन्होंने टीचर्स के बताए तरीकों को ही फॉलो किया। इसके लिए उन्होंने रोजाना 8-9 घंटे पढ़ाई की।
क्वालिटी स्टडी पर ध्यान जरूरी : महक
हरियाणा के शाहाबाद महक ने अपनी सफलता का सूत्र बताते हुए कहा कि स्टूडेंट्स को क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी की स्टडी पर ध्यान देना चाहिए। महक ने जेईई एडवांस में भी 4800 एआईआर हासिल किया है।
कड़ी मेहनत करें और अपना सर्वश्रेष्ठ दें
यमुनानगर निवासी इश्मीत कौर के अनुसार वह रोजाना आठ से 10 घंटे पढ़ाई करती थी। आज रिजल्ट आने के बाद अपनी मेहनत का फल मिला है। इश्मीत का कहना है कि तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स को कड़ी मेहनत करनी चाहिए और अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए। इतना करने के बाद नतीजा कभी खराब नहीं आ सकता। वहीं इश्मीत ने एम्स में सफलता हासिल करने के साथ ही बॉयोलॉजी ओलंपियाड में भी सफलता हासिल की है।
किस्मत पर न छोड़ दें सब
संगरूर निवासी आरुषि के अनुसार वह 10वीं तक औसत स्टूडेंट रही हैं। इसके बाद उसने अपने लक्ष्य को लेकर काफी मेहनत की। उनका मानना है कि पूरी लगन और कड़ी मेहनत से कोई काम किया जाए तो किस्मत भी पलट जाती है। एम्स में एडमिशन मिलने को किस्मत पर नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि इसके लिए पूरी मेहनत करें और अपनी किस्मत खुद बदलें।