सोई प्रधान की भूख हड़ताल खत्म, अगले
सत्र से बीई-एमबीए में नहीं होगा दाखिला
- पास होने वाले छात्रों को एफिडेविट देगी पीयू, कैंपस प्लेसमेंट का भी किया वादा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केमिकल इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में बीई-एमबीए कोर्स को बंद करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे स्टूडेंट आर्गेनाइजेशन आफ इंडिया (सोई) के कैंपस प्रधान चेतन चौधरी ने वीरवार को हड़ताल समाप्त कर दी। चौधरी की मांगों पर पीयू प्रबंधन ने सहमति जताते हुए अगले सेशन से बीई-एमबीए में दाखिला नहीं लेने की बात कही है। वहीं, पासआउट होने वाले छात्रों को डिग्री के अलावा एक शपथ पत्र भी दिया जाएगा, जिसमें सत्यापित किया जाएगा कि कोर्स पूरी तरह से वैध है। इसके लिए मौजूदा छात्रों को अब पांच साल की पढ़ाई करने के बाद अगले छह महीने ट्रेनिंग के सेशन में शामिल होने या न होने का विकल्प दिया जाएगा। साथ ही डिग्री के चार होने के बाद एमबीए का पांचवें साल में यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल के एक्सपर्ट प्रोफेसर पढ़ाई कराएंगे। हालांकि चौधरी ने मांग की थी कि उपरोक्त कोर्स में चार साल के बाद एग्जिट पॉलिसी होनी चाहिए, जिसे पीयू प्रबंधन ने मानने से इंकार कर दिया।
बता दें कि चेतन चौधरी मंगलवार से वीसी दफ्तर के बाहर भूख हड़ताल पर बैठ गए थे और मांग की थी कि बीई-एमबीए कोर्स को बंद कर दिया जाए क्योंकि इस कोर्स को आल इंडिया काउंसिल आफ टेक्निकल एजुकेशन से मान्यता प्राप्त नहीं है। कई स्वदेशी और विदेशी कंपनियों में इस डिग्री को नहीं माना जाता। इसके अलावा जीमेट और जीआरई के लिए भी इस कोर्स से दिक्कत आती है। बीई-एमबीए साढ़े पांच साल का कोर्स है। इस कोर्स में पहले चार साल बीटेक और उसके अगले डेढ़ साल एमबीए की पढ़ाई कराई जाती है।