पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने वीरवार को राज्य में बाढ़ रोकथाम की तैयारियों को प्राथमिकता देते हुए प्रबंधों और ड्रेनों की सफाई के लिए 55 करोड़ रुपये मंजूर किए। इसके साथ ही आगामी मॉनसून सत्र से पहले सभी कार्य मुकम्मल करने के निर्देश भी जारी किए।
वीडियो कांफ्रेंसिंग मीटिंग में सीएम ने वित्त विभाग से कहा कि ड्रेनों की सफाई 30 जून से पहले करवाने के लिए 50 करोड़ तुरंत डिप्टी कमिश्नरों को मुहैया करवा दिए जाएं और सभी बाढ़ रोकथाम कार्यों को जुलाई के पहले हफ्ते तक मुकम्मल कर लिया जाए। जल स्रोत विभाग के लिए भी 5 करोड़ मंजूर किए गए हैं।
इजराइल की कंपनी की तीन रिपोर्ट पर भी हुई चर्चा
मीटिंग में इजराइल की राष्ट्रीय जल कंपनी मैकरोट डेवलपमेंट एंड इंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा राज्य में पानी की स्थिति और पानी के संकट से निपटने की रूपरेखा बनाने के लिए तैयार की गई तीन प्राथमिक रिपोर्टों पर भी चर्चा हुई। यह रिपोर्टें जल क्षेत्र की मौजूदा स्थिति संबंधी अध्ययन, जल स्रोतों के अनुमान और पानी की शहरी, ग्रामीण, पशुधन और सिंचाई के लिए मांग से संबंधित थीं।
राज्य सरकार ने पिछले साल जून में जल संरक्षण और प्रबंधन मास्टर प्लान बनाने के लिए कंपनी से समझौता किया था। कंपनी ने अपनी सिफारिशें 18 महीने के अंदर देनी हैं और मास्टर प्लान की अंतिम रिपोर्ट अक्तूबर 2020 तक सौंपी जानी है।
जल स्त्रोत विभाग को ताकीद, पिछले साल जैसे हालात न हों
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पहले ही हरसंभव कदम उठाए जाएं ताकि राज्य में पिछले साल जैसे हालात न पैदा हों। कैप्टन ने कहाकि भारत सरकार के मौसम विभाग, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड समेत संबंधित विभागों से निरंतर तालमेल रखा जाए ताकि समय पर अग्रिम पूर्वानुमान लागाया जा सके और आगे इसका प्रसार किया जाए।
भाखड़ा और पौंग बांधों में अभी से बढ़ रहा जलस्तर
सरकार ने आगामी मानसून के दौरान बाढ़ से निपटने की तैयारियां तो शुरू कर दी हैं, लेकिन बीबीएमबी ने राज्यों के बड़े बांधों की जो मौजूदा स्थिति बताई है, उनसे सरकार की चिंता अभी से बढ़ने लगी है। वीसी में भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) ने अधिकारियों ने बताया कि बांधों के निकट ग्लेशियरों की बर्फ के पिघलने से भाखड़ा और पौंग डैम में पानी की आवक बढ़ जाती है। आमतौर पर यह मार्च के आखिरी हफ्ते में बर्फीले क्षेत्रों में तापमान बढने से शुरू होकर 30 जून तक जारी रहता है और इसके बाद मॉनसून आने से इनमें पानी की निकासी बढ़ती है।
इस बार तापमान के बढने के कारण दोनों डैमों के जलाशयों के पास के बर्फीले क्षेत्रों में बर्फ ज्यादा पिघली है, जिस कारण दोनों में अभी से ही पिघली हुई बर्फ का पानी पहुंच रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस साल बाढ़ के कारण पैदा होने वाले हालात से निपटने के लिए बीबीएमबी के अधिकारियों और भागीदार राज्यों हरियाणा और राजस्थान से लगातार मीटिंगें की जा रही हैं ताकि मॉनसून शुरू होने से पहले ही डैमों के पानी के स्तर की लगातार निगरानी की व्यवस्था की जा सके।
भाखड़ा से 30 और पौंग से 15 हजार क्यूसेक निकासी बढ़ाई
मीटिंगों में लिए गए फैसलों के अनुसार, भाखड़ा से पानी की निकासी को 30000 क्यूसेक औसतन तक बढ़ाया गया है और 26 मई को पानी का स्तर 1561.06 फुट था जो पिछले साल पानी के 1614.56 फुट के स्तर की अपेक्षा 53.5 फुट कम है। इसके चलते 1.51 बीसीएम पानी और समाने की क्षमता है। पौंग डैम से पानी की निकासी 15000 क्यूसेक औसतन के हिसाब से बढ़ाई गई है और 26 मई को यहां पानी का स्तर 1346.54 फुट रहा जबकि पिछले साल यह स्तर 1337.72 फुट था। पौंग डैम में ज्यादा पानी बरसात के कारण आता है और यहां बर्फ के पिघलने के कारण आने वाले पानी की मात्रा बहुत कम है।