खुद को समझ रहे थे हेल्दी, जांच हुई तो निकले डायबिटीक
सबहेड
एक हजार लोगों पर किया गया सर्वे, 39 प्रतिशत प्री डायबिटिज व दो प्रतिशत मिले डायबिटीज पीड़ित
पीजीआई के एंडोक्रिनोलॉजी डिपार्टमेंट की स्टडी में हुआ खुलासा
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो बिना किसी लक्षण के दबे पांव आती है। लोगों को पता भी नहीं चलता और वे डायबिटीज के मरीज बन जाते। हाल ही में पीजीआई के एंडोक्रिनोलॉजी डिपार्टमेंट ने चंडीगढ़ के सेक्टरों और कालोनी में एक हजार लोगों में विटामिन डी और बोन डेंसिटी की जांच की। इस दौरान जो लोग खुद को फिट बता रहे थे, जांच में वे डायबिटीज के शिकार मिले। खास बात यह है कि इन लोगों में डायबिटीज के कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहे थे। हेल्दी होने के कारण उन्होंने भी कभी किसी तरह की जांच कराने की जहमत नहीं उठाई। यदि वे डायबिटीज के बारे में जागरूक होते और समय-समय पर टेस्ट कराते रहते तो शायद इस गंभीर बीमारी से बच सकते थे। डाक्टरों ने बताया कि चंडीगढ़ में डायबिटीज का फैलाव दूसरे शहरों के मुकाबले ज्यादा है। यह कई स्टडी में साफ हो चुका है। अधिक देर तक बैठे रहने की आदत चंडीगढ़ को डायबिटीज की राजधानी बनाने में जुटी है।
39 प्रतिशत लोग प्री डायबिटीज की चपेट में
सर्वे के दौरान यह भी देखने को मिला कि करीब 39 प्रतिशत लोग प्री डायबिटीज की स्टेज पर थे। यह काफी चौंकाने वाला आंकड़ा है। स्टडीज बताती हैं कि हर साल पांच प्रतिशत लोग प्री डायबिटीज से डायबिटीज की स्टेज में पहुंच जाते हैं। पीजीआई के एंडोक्रिनोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रो. संजय बडाडा ने बताया कि प्री-डायबिटीज, डायबिटीज होने से पहले की स्थिति है। जब डायबिटीज कंफर्म होती है, उससे छह से दस साल पहले से लोग प्री-डायबिटीज की स्टेज से गुजर रहे होते हैं। इस स्टेज में फास्टिंग का शुगर लेवल ज्यादा आता है और खाने के बाद शुगर लेवल नॉर्मल होता है। प्री-डायबिटीज की अवस्था से गुजर रहे पांच प्रतिशत लोग हर साल डायबिटीज के रोगी बन जाते हैं। ऐसे लोगों को ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि समय पर उनकी जांच हो और वे अपनी लाइफ स्टाइल को चेंज करें।
ऐसे रोंके डायबिटीज
- हाइट को सेंटीमीटर में बदलें और उसे 100 से घटाएं, जितना आंकड़ा आए उतना ही अपना वजन रखें
- हाई कैलोरी (घी, जंक फूड, फैटी चीजें) फूड खाने से परहेज करें।
- रोजाना 45 से 50 मिनट की एक्सरसाइज करें।
- कोशिश करें कि ब्रिस्क वॉक करें। इसमें एक मिनट में 80 कदम चलने होते हैं।
- पैरंट्स में से किसी को डायबीटीज है या दादा-दादी, नाना-नानी आदि को डायबीटीज है तो 30 साल की उम्र के बाद हर साल शुगर टेस्ट जरूर कराएं।
- तनाव से भी ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जो आगे चलकर डायबिटीज का कारण बनता है। इसलिए तनाव से निपटने के लिए एरोबिक्स करें, मेडिटेशन करें, अच्छा म्यूजिक सुनें।
- शराब और सिगरेट से दूरी बनाएं। देखा गया है कि इसका सेवन करने वाले डायबिटीज का रिस्क ज्यादा रहता है।
कोट
हमने सेक्टर 15, 22, 38 और इंदिरा कालोनी में विटामिन डी और बोन डेंसिटी का सर्वे किया। प्राइमरी तौर पर जो रिजल्ट आए हैं, उसके मुताबिक प्री डायबिटीज स्टेज का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। कुछ ऐसे मिले जो अपने को हेल्दी बता रहे थे, मगर जांच में उन्हें डायबिटीज मिली।
-प्रो. संजय बडाडा, प्रोफेसर एंडोक्रिनोलॉजी डिपार्टमेंट पीजीआई चंडीगढ़