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पीटी उषा

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ट्रैक पर दौड़ने की बात ही अलग है : पीटी उषा
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कोचिंग पर चर्चा करते हुए पद्मश्री पीटी उषा बोलीं, अब युवाओं को तैयार करना मुश्किल
कहा, कोचिंग में खिलाड़ियों के हर विभाग में काम करना पड़ता है। रिजल्ट भी कोच को ही देना होता है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कोचिंग से बेहतर था जब मैं दौड़ती थी। यह कहना पद्मश्री से सम्मानित उड़न परी पीटी उषा का। यह बात उन्होंने प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कही। पीटी उषा ने कहा कि अब युवाओं को तैयार करना मुश्किल है। इससे तो अच्छा तब था जब मैं दौड़ती थी। उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कोचिंग सबसे कठिन कार्य है। कोचिंग में खिलाड़ियों के हर विभाग में काम करना पड़ता है। रिजल्ट भी कोच को ही देना होता है। वास्तव में जरूरी यह है कि एथलीट भी जबरदस्त मेहनत करे। वह खुद पर कितना वर्क करता है इसी बात पर निर्भर करता है कि वह कितना सफल होगा। उन्होंने कहा कि जब वह एथलीट के दौर में थीं तो उनका ध्यान हमेशा रेस और जीतने पर रहता था। उनकी कोच की भूमिका काफी कठिन है।
उन्होंने कहा कि भारत के युवा एथलीट बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन उनको एक्सपोजर देना एसोसिएशन और फेडरेशन का काम है। एथलीट को ग्रास रूट पर तैयार करना काफी जरूरी है। अब अच्छी बात है कि भारत में अंडर-16, अंडर-18 और जूनियर स्तर पर काफी अच्छे एथलीट हैं।
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खेलो इंडिया से देश को मिलेंगे बेहतरीन एथलीट
सरकार की ओर से शुरू की गई खेलो इंडिया के बारे में पीटी ऊषा ने कहा कि यह युवा खिलाड़ियाें के लिए बेहतरीन प्लेटफार्म है। फिलहाल इसकी अभी शुरुआत हुई है। इसके लिए रिजल्ट का इंतजार करना होगा। खेल मंत्रालय की ओर से बेहतरीन कार्य किया जा रहा है। इसमें ग्रास रूट पर उभरती प्रतिभाएं सामने आ सकती हैं। जिनको इंटरनेशनल स्तर पर ट्रेनिंग दी जा रही है। ऐसे में ओलंपिक और इंटरनेशनल स्तर पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतरीन होगा।

पहले से ज्यादा एथलीटों को एक्सपोजर
पीटी उषा ने बताया कि अब खिलाड़ियों को ज्यादा प्रेक्टिस मैच और एथलेटिक चैंपियनशिप में भाग लेने का मौका मिल रहा है। एक एथलीट जितना अधिक चैंपियनशिप में खेलेगा उसके खेल में उतना निखार आएगा। उन्होंने अपने समय की बात करते हुए कहा कि ओलंपिक होने थी और उसकी तैयारी के लिए मुझे सिर्फ एक चैंपियनशिप खेलना का मौका मिला था। अब पहले से अधिक चैंपियनशिप हो रही हैं। इसके कारण युवा एथलीट उभरकर सामने आ रहे हैं। इंडिया में शॉटपुट तथा जेवलिन थ्रो तथा दौड़ में एथलीट बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।

हार के बाद हुई आलोचन से मन हुआ था दुखी
उन्होंने बताया कि 1984 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में मिली हार के बाद जिस प्रकार उनकी आलोचना हुई थी उसके बाद उन्होंने एथलीट छोड़ने का मन बनाया था। किस प्रकार से एक हार पर हजार जीत भारी पड़ जाती हैं। उस घटना ने मुझे बहुत तोड़ दिया था, लेकिन अभिभावकों ने हमेशा से ही सपोर्ट किया और अभी भी करते हैं।

इंजरी से ओलंपिक में कुछ सेकेंड से गंवाया मेडल
पीटी उषा ने बताया कि ओलंपिक में मेडल जीतने का सपना हर खिलाड़ी का होता है, वैसे ही मेरा भी था। सपना मेरा भी टूटा है जिसका मलाल मुझे अभी तक है। फाइनल रेस के अंतिम क्षणों में उन्हें इंजरी हो गई थी जिसकी वजह से मेडल जीतने से चूक गईं।

एशियन चैंपियनशिप में की थी जबरदस्त वापसी
ओलंपिक के अगले वर्ष ही एशियन चैंपियनशिप हुई। उस प्रतियोगिता में भारत मेडल टैली में 14वें स्थान पर था और भरत की झोली में कोई भी मेडल नहीं था। जब उनकी रेस हुई तो उन्होंने एक के बाद एक 5 गोल्ड और 1 ब्राउंज मेडल जीता और भारत मेडल तालिका में चौथे पायदान पर आया था। वह उनके लिए सबसे गर्व का दिन था।
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इंडियन ग्रेड प्रिक्स-4 एथलीट चैंपियनशिप आज
इंडियन ग्रेड प्रिक्स-4 एथलीट चैंपियनशिप का आयोजन ताऊ देवी लाल स्टेडियम पंचकूला में बुधवार से किया जाएगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए पद्मश्री पीटी उषा ने बताया कि इसमें एशियन व वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक विजेता खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। युवा एथलीटों को बेहतरीन प्रदर्शन करके अपनी दावेदारी पेश करने का यह अच्छा मौका हैं। इस चैंपियनशिप में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को एशियन चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेलने का मौका मिलेगा।

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