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24 करोड़ से बने अस्पताल को नहीं मिल रहे डॉक्टर

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24 करोड़ से बने अस्पताल को नहीं मिले
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डॉक्टर, पीपीपी मोड पर चलाने की तैयारी

- एडवाइजर ने इच्छुक प्राइवेट पार्टियों के साथ इसको लेकर बातचीत करने को कहा
- सेक्टर 48 में एक साल पहले 100 बेड का बनकर तैयार हो चुका है अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शहरवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन सेक्टर-48 के हॉस्पिटल को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर चलाने की तैयारी में है। प्रशासन 24 करोड़ से 2018 में बनकर तैयार 100 बेड के अस्पताल को पीपीपी मोड पर देने के लिए प्रपोजल तैयार कर रहा है। यहां पर 80 से ज्यादा डॉक्टरों की भर्ती को मंजूरी नहीं मिलने पर यह योजना तैयार की गई है।
इस संदर्भ में एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय को डॉक्टरों की भर्ती करने का प्रस्ताव प्रशासन ने भेजा है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। इसे देखते हुए प्रशासन पीपीपी मोड पर देने पर विचार कर रहा है। एडवाइजर ने कहा कि अगर कोई बड़ी अस्पताल चेन प्रशासन की शर्तों के मुताबिक चलाने को आगे आती है तो कुछ साल के लिए बातचीत की जा सकती है।
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आम लोगों को सस्ता मिलेगा इलाज
एडवाइजर का कहना है कि पीपीपी मोड पर बात बनी तो प्रशासनिक अधिकारियों की कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी न केवल एग्रीमेंट की शर्तें तय करेगी, बल्कि इसका भी ध्यान रखेगी कि शहर के सरकारी अस्पतालों की तर्ज पर ही यहां सस्ता और बेहतर इलाज मिले। समझौते में ख्याल रखा जाएगा कि ओपीडी या सर्जरी आदि के जो रेट प्राइवेट अस्पतालों में हैं, उतने रेट यहां न हों। एग्रीमेंट ऐसा होगा कि यहां लोगों को कॉमन इलाज मिल सके।

यहां पर दबाव होगा कम
एडवाइजर की मानें तो अस्पताल शुरू होने के बाद शहरवासियों को इसका फायदा मिलेगा। पीजीआई, जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16, मनीमाजरा अस्पताल व सेक्टर-22 अस्पताल पर मरीजों का जो दबाव है, वह काफी हद तक कम किया जा सकेगा। पंजाब और आसपास के अलावा दक्षिणी सेक्टर के मरीजों को इससे लाभ मिलेगा।
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24 करोड़ की लागत से बना हॉस्पिटल
करीब 24 करोड़ की लागत से सेक्टर-48 में अस्पताल का शानदार भवन बनकर तैयार है। यह अस्पताल मोहाली के साथ-साथ पंजाब सहित दक्षिणी सेक्टर के लोगों की जरूरत पूरी करेगा। इमरजेंसी से लेकर ट्रॉमा के मरीजों का यहां उपचार हो सकेगा।
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