1.50 लाख यात्रियों के लिए सीटीयू अकेले चला रहा 413 बसें
- ट्राइसिटी में मोहाली से जीरो और पंचकूला से चलाई जा रही 10 बसें
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ट्राइसिटी में लोकल पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर यात्रियों का पूरा बोझ चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के कंधों पर है। हर रोज चंडीगढ़ से पंचकूला और मोहाली आने-जाने वाले तकरीबन 1.50 लाख यात्रियों के लिए चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) 413 बसें चला रहा है। वहीं, पंचकूला से महज 10 बसें और मोहाली से लोकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर सर्विस जीरो है। इसके चलते सीटीयू को अपनी बसों की सर्विस डेराबस्सी, जीरकपुर, पंचकूला तक देनी पड़ती है। इससे चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट पर काफी दबाव पड़ रहा है, लेकिन यूटी प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद भी पंचकूला और मोहाली इस मसले पर कुछ करने को तैयार नहीं हैं।
बसों की सर्विस शहर से पंचकूला और मोहाली में अधिक होने के चलते सिटी में बसों की फ्रिक्वेंसी पर असर पड़ता है। इसके बाद भी पंचकूला और मोहाली लोकल बसें चलाने पर विचार नहीं कर रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पूरे ट्राइसिटी के यात्रियों का बोझ केवल चंडीगढ़ के ही कंधों पर क्यों डाल रखा गया है। आखिर पंचकूला और मोहाली पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए लोकल बसों की संख्या क्यों नहीं बढ़ाते। इसके लिए कई बार यूटी प्रशासन के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से दोनों को लिखा भी जा चुका है।
लोकल रूट्स पर चल रहीं इतनी बसें
सीटीयू के बेड़े में कुल 539 बसें है। इनमें से 413 बसों को सीटीयू लोकल रूट्स पर और 126 बसें इंटर स्टेट रूट्स पर पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली समेत अन्य राज्यों के लिए चलाई जा रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक सीटीयू की बसें प्रतिदिन करीब 1.20 लाख किलोमीटर चलती है। जिनमें प्रतिदिन करीब दो लाख यात्री सफर करते हैं।
आवागमन पर पड़ता है असर
पंचकूला से 10 और मोहाली से एक भी बस न चलने की वजह से चंडीगढ़ की बसों को इन दोनों शहरों के यात्रियों को भी ढोना पड़ता है। आलम यह है कि सीटीयू की बसों को चंडीगढ़ से डेराबस्सी, परवाणू, कालका समेत दोनों शहरों के अन्य कई एरिया को कवर करना पड़ता है। जिस कारण से बसों की फ्रिक्वेंसी दूरी अधिक होने और दूसरे शहरों में अधिक बसें जाने की वजह से शहर में कम होती है।
कोट..........
ट्राइसिटी में बसों की बेहतर कनेक्टविटी के लिए पंचकूला और मोहाली को कई बार कहा गया है, लेकिन अभी तक दोनों शहरों ने इस तरफ कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई है, जिसकी वजह से आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
-डॉ. अजय सिंगला, ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी