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नाटक से दिखाया बंटवारे का दर्द

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यात्रा-1947 में दिखा बंटवारे का दर्द
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टैगोर थियेटर में नाट्य फेस्टिवल का दूसरा दिन

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। टैगोर थियेटर में चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित पंजाबी नाट्य फेस्टिवल के दूसरे दिन यात्रा 1947 नाटक का मंचन किया गया। यह नाटक बंटवारे की कहानी पर आधारित है। इसे निर्देशित किया केवल धालीवाल ने। इस नाटक में कई दृश्य सच्ची घटनाओं पर आधारित हैं। इसके साथ ही नाटक में अमृता प्रीतम, डाक्टर हरभजन सिंह और शिव कुमार बटालवी के साथ डा. सुरजीत पातर की लिखी कविताएं भी हैं। इसमें कई ऐसी कविताएं ली गईं हैं जो दोनों ही मुल्कों के कवियों ने लिखी हैं। नाटक में संदेश है कि बेशक बंटवारा हो गया और सरहद पर लकीरें खिंच गईं उसके बावजूद लोगों को मिलने की इजाजत होनी चाहिए।
इस नाटक की शुरुआत बंटवारे और दंगों से होती है। इसमें एक ऐसे परिवार की कहानी दिखाई गई जो कि हिंदुस्तान से पाकिस्तान जा रहे हैं। उनको भूख लगती है तो खेत में लगी छल्लियां खाने लगते हैं। वहां उनको आग जलती दिखाई देती है और वह छल्ली को उसमें भून लेते हैं। एकदम से पता लगता है कि यह आग नहीं है बल्कि यहां तो चिता जल रही है।
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इसी में एक कहानी दिखाई गई कि एक लड़की को पाकिस्तान से हिंदुस्तान ले आया गया और हिंदुस्तान में लड़की की शादी हो गई। उस लड़की का एक बेटा छूट गया। अब उसको पाकिस्तान जाने को कहा जाता है तो वह अपने हिंदुस्तान में जन्मे बेटे को नहीं छोड़ना नहीं चाहती है और वह कहती है कि उनको न पाकिस्तान चाहिए न हिंदुस्तान उसको तो अपने दोनो बेटे चाहिए। नाटक की समाप्ति डा. सुरजीत पातर की लिखी कविता तू जगा दे मोमबत्तियां, ये वगदियां रहणीयां, हवावां तत्तियां से होती है।
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इस नाटक में जितेंदर कौर, गुरतेज मान, भवेल संधू, सुखविंदर विर्क, वीरपाल कौर, देविका, सुक्खी सिद्धू, जितेंदर सोनू, विकास जोशी, जसवंत सिंह रिद्म विशाल, विजय कुमार, गौतम ने अभिनय किया है।
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