डीसी के पूर्व पीए और सीनियर असिस्टेंट ने मांगी अग्रिम जमानत
- राकेश मोहन और हरि मोहन ने जिला अदालत में याचिका दायर की
- अदालत ने दोनों याचिकाएं वीरवार को कंसीडरेशन के लिए रखी
- प्रॉपर्टी केस की फाइल खोने पर हुआ था इस्टेट विभाग के तीन कर्मियों पर केस
अमरीश शर्मा
चंडीगढ़। सेक्टर-33बी स्थित एक प्रॉपर्टी की फाइल गायब होने के करीब 16 साल बाद दर्ज मामले में डीसी के पीए रहे राकेश मोहन और तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट व सीनियर असिस्टेंट हरि मोहन ने केस में गिरफ्तारी से बचने के लिए जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। दोपहर बाद अदालत पहुंची याचिका को एडीजे कोर्ट ने कंसीडरेशन के लिए रख दिया है। इस पर वीरवार को सुनवाई होगी।
राकेश मोहन और हरि मोहन की ओर से दायर याचिका में अपील की गई है कि वह पिछले 25 और 32 साल से सरकारी नौकरी पर हैं। इसके अलावा फाइल खोने का जो आरोप है, वह आधारहीन है। सरकारी रिकार्ड में दर्ज है कि वह फाइल ब्रांच से संबंधित अथॉरिटी को भेजी गई थी। ऐसे में जब फाइल उसके पास ही नहीं है तो उन पर फाइल खोने का आरोप गलत है।
वहीं, याचिकाकर्ताओं के अनुसार मामले में उनकी गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं है, क्योंकि उनसे कोई रिकवरी नहीं होने वाली। पुलिस को उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता भी नहीं है। इसके अलावा अगर अदालत उन्हें अग्रिम जमानत देती है तो वह पुलिस जांच ज्वाइन कर पूरा सहयोग करने को तैयार हैं।
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यह है मामला
एडवाइजर के आदेश पर डीसी के पीए राकेश मोहन सहित इस्टेट आफिस के दो अन्य कर्मचारियों पर फाइल गायब होने के मामले में सेक्टर-17 थाना पुलिस ने 6 जुलाई को केस दर्ज किया था। पुलिस ने राकेश मोहन के अलावा तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट (हाउसिंग ब्रांच) और सीनियर असिस्टेंट हरि मोहन के खिलाफ आईपीसी की धारा-409 (सरकारी कर्मी द्वारा अमानत में खयानत) के तहत मामला दर्ज किया था। यह केस सेक्टर-33बी स्थित एक प्रापर्टी की फाइल गायब होने के मामले में करीब 16 साल बाद आरोपियों पर मामला दर्ज किया गया है। उक्त कोठी मंजीत कौर के नाम अलॉट की गई थी। मंजीत ने इस कोठी की एवज में 10 फीसदी किस्त भी जमा करा दी थी। बाद की किस्तें जमा न होने के कारण इस्टेट आफिस की ओर से इस कोठी की अलॉटमेंट को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए गए थे। वर्ष 2008 में दोबारा से प्लॉट की अलॉटमेंट के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई। यह मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट तक गया। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को दोबारा कोठी के अलॉटमेंट को लेकर नीलामी प्रक्रिया पर स्टे लगा दिया था और यूटी प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया था। मामले से जुड़ी फाइल जब हाईकोर्ट में पेश करने की बारी आई तो इस्टेट आफिस से यह फाइल गायब की जा चुकी थी। इस्टेट आफिस के रिकॉर्ड में यह फाइल आखिरी बार तत्कालीन डीसी के पीए रहे राकेश मोहन के पास थी। फाइल गुम होने की सूचना के बाद विभागीय जांच शुरू हुई। फाइल गुम होने की वजह से प्रशासन को हाईकोर्ट से कड़ी फटकार लगी थी। मामले की विजिलेंस जांच हुई तो उसके बाद चीफ विजिलेंस अधिकारी (एडवाइजर) के आदेश पर सेक्शन आफिसर ने तीनों कर्मियों के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने संबंधित धारा में केस दर्ज किया।